सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद संजय सिंह की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 105 प्राथमिक विद्यालयों को बंद करने के निर्णय को चुनौती दी थी।
यूपी सरकार ने 16 जून को एक आदेश जारी कर कुछ प्राथमिक विद्यालयों को कम छात्र संख्या के आधार पर बंद करने या फिर उन्हें तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित अन्य विद्यालयों के साथ विलय करने का निर्णय लिया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए संजय सिंह ने कहा था कि यह कदम मनमाना है और बच्चों के शिक्षा के अधिकार के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह निर्णय न केवल संविधान के अनुच्छेद 21ए का उल्लंघन करता है बल्कि शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम की मूल भावना के भी विपरीत है।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति ए. जी. मसीह शामिल थे, ने याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि चूँकि यह मामला पहले से ही इलाहाबाद उच्च न्यायालय में लंबित है और आदेश को निरस्त करने से जुड़ा है, इसलिए इसका फ़ैसला वहीं होना उचित होगा।
सुनवाई के दौरान अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अधिवक्ता डॉ. फारुख खान की सहायता से अदालत को बच्चों की कठिनाइयों और संभावित दुर्दशा से अवगत कराया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मामला फिलहाल हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है और उसी को निर्णय करना चाहिए।
