भारत ने जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में चिनाब नदी पर 1,856 मेगावाट की सावलकोट जलविद्युत परियोजना के लिए बुधवार को टेंडर जारी कर दिए हैं। यह कदम सिंधु जल संधि को निलंबित करने के बाद उठाया गया है, जिससे पाकिस्तान की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। यह परियोजना सिद्धू गांव के पास स्थापित की जाएगी और टेंडर की अंतिम तिथि 10 सितंबर रखी गई है।
1960 के दशक में प्रस्तावित इस परियोजना को लंबे समय तक ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। अब केंद्र सरकार छह रुकी हुई परियोजनाओं को तेज़ी से शुरू करने की तैयारी में है। इनमें सावलकोट के अलावा किरथाई-I और II (1,320 MW), पाकल दुल (1,000 MW) और तीन अन्य परियोजनाएं शामिल हैं, जिससे कुल 10,000 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता विकसित की जा सकेगी।
राज्यसभा में “ऑपरेशन सिंदूर” पर विशेष चर्चा के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, “सिंधु जल संधि एकतरफा थी, अब भारत के किसानों को भी इस पानी का हक मिलेगा।”
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दो टूक कहा, “जब तक पाकिस्तान आतंकवाद से पूरी तरह तौबा नहीं करता, तब तक ‘खून और पानी साथ नहीं बह सकते’।”
22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के बाद संधि को निलंबित कर दिया गया था।
