पूर्व संचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पेगासस जासूसी मामले में अपना बयान रखा है जिसमें उन्होंने कांग्रेस के आरोपों पर केंद्र सरकार का बचाव करते हुए कांग्रेस का इतिहास ही जासूसी का बताया। उन्होंने इसे देश विरोधी एजेंडा चलाने वालों की साजिश कहा। रविशंकर प्रसाद ने सवाल किया है कि जासूसी कांड का बखेड़ा संसद के मानसून सत्र के पहले क्यों खड़ा किया गया? उन्होंने कहा कि देश में फोन टैपिंग को लेकर सशक्त कानून हैं। इन प्रक्रियाओं का पालन करते हुए टैपिंग हो सकती है।
उन्होंने सरकार पर स्तरहीन आरोप लगाए जाने की बात कही। “भाजपा पर ऐसे स्तरहीन आरोप लगाए हैं, जो राजनीतिक शिष्टाचार और मर्यादा से परे हैं। क्या कांग्रेस पार्टी का भी यह स्तर हो गया है, लेकिन क्या कहा जाए, आज के नेतृत्व में जो कांग्रेस पार्टी बालाकोट और उरी में देश के जवानों की शहादत का सबूत मांगती है, उससे और क्या अपेक्षा की जाए?” प्रसाद ने सवाल किया।
ज्ञात हो कि साल 2019 में जब पहली बार पेगासस स्पाइवेयर के जरिए जासूसी की खबरें आई थीं, तब आईटी मंत्रालय रविशंकर प्रसाद संभाल रहे थे और उन्होंने सरकार के पक्ष में सफाई दी थी। मीडिया से बात करते हुए आज उन्होंने कहा, “पेगासस स्पाइवेयर की निर्माता कंपनी एनएसओ ने स्पष्ट कहा है कि इनके क्लाइंट ज्यादातर पश्चिमी देश हैं, तो इस मामले में भारत को क्यों निशाना बनाया जा रहा है? इसके पीछे क्या कहानी है? कहानी में क्या ट्विस्ट है?” रिपोर्ट के समय पर सवाल उठाते हुए प्रसाद ने पूछा,”क्या मानसून सत्र से पहले ‘एक नया माहौल बनाने’ के लिए कुछ लोग जानबूझकर खबर ब्रेक करने की कोशिश कर रहे थे? क्या हम इस बात से इनकार कर सकते हैं कि ऐमेनेस्टी जैसी संस्थाओं का भारत विरोधी एजेंडा है?”
उन्होंने उस अंतरराष्ट्रीय संगठन का जिक्र किया जिसने लिस्ट जारी की थीं, जिन पर भारतीय और विदेशी मीडिया ने विस्तृत जांच की थी। सरकार की भूमिका का खंडन करते हुए उन्होंने कहा, “इस पूरे पेगासस प्रकरण से भारत सरकार या भाजपा को जोड़ने के मामले में अंशमात्र भी सबूत नहीं है। सरकार की भूमिका का सवाल तब पैदा हुआ, जब एनएसओ ने शुरुआत से कहा कि वे अपना सॉफ्टवेयर केवल ‘जांची-परखी सरकारों’ और उनकी एजेंसियों को देती है।” प्रसाद ने अधिकारों का हवाला देते हुए कहा कि,”सरकार अपने नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें निजता का अधिकार भी शामिल है।”
