राजद की भाषा दोहरा रहे प्रशांत, 2015 में थे नीतीश के खास, जानें क्यों बदले सुर और कहां गई ‘बात बिहार की’

बिहार में 2015 विधानसभा चुनावों के नतीजों के एलान के ठीक एक दिन पहले सीएम आवास एक अणे मार्ग में गहमागहमी थी। मीडिया की गाड़ियां और कुछ चुनिंदा लोग सीएम आवास में जुटे थे। यह भीड़ उन लोगों की थी जो टीम पीके का हिस्सा थे। जिन्होंने इन चुनावों में नीतीश के लिए या यूं कहें कांग्रेस-राजद-जदयू के लिए रणनीति बनाई थी और आस्वस्त थे कि जीत तय है।


इसके बाद प्रशांत किशोर जदयू में नंबर दो रहे। सब ठीक था लेकिन जदयू-राजद के गठबंधन टूटा। बीजेपी के साथ नीतीश सत्ता में आये और प्रशांत का कैबिनेट मंत्री के बराबरी का दर्जा छीन गया।

बाद के दिनों में सीएए-एनआरसी मुद्दे पर मुखर होने की वजह से प्रशांत जदयू से बाहर हो गए। इसके बाद 2020 चुनावों से पहले ‘बात बिहार की’ कार्यक्रम शुरू हुआ। हालांकि बाद के दिनों में न बात होती दिखी न इस बात को शुरू करने वाले प्रशांत किशोर बिहार में चुनावों के दौरान कहीं नजर आए।


हालांकि इन सब के बीच रह-रह कर मीडिया में उनसे जुड़ी खबरें जरूर आई। कभी कहा गया कि लोजपा के पीछे पीके का प्लान है तो कभी राजद के लिए कैंपेन करने की बात कही गई। हालांकि यह बातें औपचारिक तौर पर सामने नही हैं।

अब नतीजों के एलान के बाद प्रशांत ने एक बार फिर सीएम नीतीश कुमार पर निशाना साधा है। राजद की भाषा बोलते हुए प्रशांत ने एक ट्वीट के माध्यम से सीएम नीतीश पर निशाना साधा है।

कभी नीतीश कुमार के करीबी रहे किशोर ने कहा, ”बीजेपी मनोनीत मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने पर नीतीश कुमार को बधाई।” उन्होंने कहा, ”सीएम के रूप में एक थके हुए और राजनीतिक रूप से कमजोर नेता के साथ, बिहार को खुद को कुछ और सालों के अभावग्रस्त शासन के अप्रिय स्थिति के लिए तैयार करना चाहिए।” आपको बता दें कि महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव ने भी अपने ट्वीट में नीतीश कुमार को मनोनीत मुख्यमंत्री कह संबोधित किया था।

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