Mission 2024-बीजेपी में बदलाव का दौर, चार राज्यों में नए प्रदेश अध्यक्ष

भारतीय जनता पार्टी ने आज कई संगठनात्मक बदलाव किए हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने आज तीन राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों के नाम को घोषणा की है। इनमे बिहार में पार्टी ने सम्राट चौधरी को बड़ा जिम्मा सौंपते हुए प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। सम्राट कभी लालू के करीबी रहे तो कभी जदयू में रहते मांझी खेमे के पक्ष में रह नीतीश के खिलाफ बोला। फिलहाल वह भाजपा में हैं और सीएम नीतीश और डिप्टी सीएम तेजस्वी पर हमलावर रुख अख्तियार किए हुए हैं। इसके अलावा पार्टी ने राजस्थान में सतीश पूनिया को हटाकर लोकसभा सांसद सीपी जोशी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। वहीं दिल्ली में कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा को और ओडिशा में पार्टी ने पूर्व मंत्री मनमोहन सामल को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है।

यूं तो यह अनुमान काफी पहले से लगाए जा रहे थे और भारतीय जनता पार्टी की 16 और 17 जनवरी को आयोजित राष्ट्रीय कार्यकारिणी के बैठक के बाद यह स्पष्ट हो गया था कि पार्टी का एजेंडा अब मिशन 2024 का है और अगले 400 दिन पार्टी एड़ी चोटी का जोर लगाती नजर आएगी। हालांकि इस बीच लगभग 10 राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं। इनमे से तीन राज्यों में चुनाव संपन्न हो चुके हैं और भाजपा के लिए इनके नतीजे उत्साहजनक रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स और पार्टी के सूत्रों के मुताबिक पार्टी किसी भी चुनाव में कोई भी कोताही बरतने के मूड में नहीं है। यही वजह है कि त्रिपुरा जैसा छोटा राज्य हो या अप्रैल मई में कर्नाटक चुनाव या साल के अंत में होने वाले मध्यप्रदेश और राजस्थान जैसे बड़े राज्यों के चुनाव, सभी पर पार्टी में मंथन और बैठकों का दौर जारी है। इन मैराथन बैठकों, सर्वे और अंदरखाने से छनकर निकल रही खबरों की मानें तो पार्टी में कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। केंद्रीय कैबिनेट के विस्तार की खबरें भी रह रह कर उठती रही हैं। अब जबकि कई राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष बदले जा चुके हैं इसके बावजूद भी अभी कई बड़े बदलाव पार्टी में देखने को मिल सकते हैं।

अब बात राज्यों की करें तो कार्यकारिणी बैठक के दौरान जब पीएम मोदी कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा से मिले तो राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हुई की क्या कर्नाटक में मुख्यमंत्री बदले जाएंगे? हालांकि अभी तक पार्टी से इस बाबत कोई संकेत नहीं मिला है। कर्नाटक के दौरे पर जब भी पीएम पहुंचे येदियुरप्पा मंच लूट ले गए ऐसे में यह साबित होता है कि लिंगायत समुदाय के सबसे बड़े नेता येदियुरप्पा के बिना पहले से एंटी इनकंबेंसी से जूझ रही पार्टी के लिए कर्नाटक की चुनावी वैतरणी पार करना संभव नहीं है।

यही वजह है कि येदियुरप्पा को प्रचार की कमान सौंपना लगभग तय है। सीएम बसावराज बोम्मई टीम के कप्तान जरूर हैं लेकिन भूमिका सीमित होगी। मीडिया में चल रही खबरों कि मानें तो यह भी लगभग तय है कि अगर पार्टी चुनाव जीतती है तो भी बोम्मई की वापसी नहीं होगी। कर्नाटक में बोम्मई की अगुवाई वाली सरकार के साथ साथ प्रदेश अध्यक्ष के कार्य से भी पार्टी का शीर्ष नेतृत्व संतुष्ट नहीं है ऐसे में माना जा रहा है कि कई बड़े बदलाव आने वाले दिनों में देखने को मिल सकते हैं।

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अब बात मध्यप्रदेश की, कहने, देखने, सुनने में सब शांत जरूर नजर आ रहा है लेकिन यह तय है कि बदलाव के इस दौर में मध्यप्रदेश भी अछूता नहीं रहेगा। देखना यह है कि बदलाव किस स्तर पर होंगे लेकिन यह तय है होंगे जरूर। साथ ही चेहरा कौन होगा और संगठन या सरकार के स्तर पर कहां कहां बदलाव होंगे यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा लेकिन  इतना स्पष्ट है कि 2024 से पहले बीजेपी में बदलाव वाली सर्जरी का दौर अभी जारी रहेगा।

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