बिहार में वोटर लिस्ट की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह आधार कार्ड और वोटर आईडी (EPIC) को मान्य दस्तावेजों में शामिल करे। कोर्ट ने कहा कि ये सरकारी दस्तावेज़ हैं और इनमें विश्वसनीयता की “प्रिज़म्पशन” रहती है।
जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “कोई भी दस्तावेज़ फर्जी हो सकता है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि आप आधार और EPIC को बाहर रखें। आप इन्हें मान्य मानिए और जहाँ फर्जीवाड़ा मिले, वहाँ केस-बाय-केस कार्रवाई कीजिए।”
चुनाव आयोग ने पहले इन दस्तावेजों को खारिज किया था, फर्जी राशन कार्ड का हवाला देते हुए। इस पर कोर्ट ने तर्क दिया कि आपने जिन 11 दस्तावेजों को मान्यता दी है, उनमें भी फर्जीवाड़ा संभव है।
जस्टिस सूर्यकांत ने आयोग को फटकारते हुए कहा, “‘इन मास एक्सक्लूज़न’ नहीं, ‘इन मास इनक्लूज़न’ होना चाहिए।”
हालांकि कोर्ट ने 1 अगस्त को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट प्रकाशित करने पर रोक नहीं लगाई, लेकिन यह साफ किया कि अंतिम निर्णय कोर्ट के फैसले पर निर्भर रहेगा।
मामले की जल्द सुनवाई का आश्वासन देते हुए कोर्ट ने सभी वकीलों से तर्क पेश करने का अनुमानित समय बताने को कहा है।
