सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कहा है—अगर किसी कैदी को अदालत ने तय अवधि की उम्रकैद (Fixed Term Life Sentence) दी है और वह अवधि पूरी हो चुकी है, तो उसे एक दिन भी जेल में नहीं रोका जा सकता।
यह आदेश नितीश कटारा हत्याकांड के दोषी सुखदेव पहलवान उर्फ़ सुखदेव यादव के मामले में आया। 2014 में दिल्ली हाई कोर्ट ने सुखदेव को 20 साल की उम्रकैद सुनाई थी, जिसमें किसी तरह की छूट, पैरोल या रियायत को शामिल नहीं किया गया था। मार्च 2024 में यह अवधि पूरी हो गई।
जुलाई 2024 में हाई कोर्ट ने उसकी रिहाई का आदेश दिया, लेकिन दिल्ली की सेंटेंस रिव्यू बोर्ड (SRB) ने “जेल में अनुशासन” का मुद्दा उठाकर रिहाई टाल दी। इस बीच, सुखदेव को तीन महीने की फरलो दी गई, लेकिन स्थायी रिहाई नहीं।
न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने SRB की दलील खारिज करते हुए कहा—
“जब अदालत ने सजा की अवधि तय कर दी है, तो वह पूरी होते ही कैदी को रिहा करना अनिवार्य है।”
यह फैसला कई ऐसे कैदियों के लिए राहत बन सकता है जिनकी तय अवधि की उम्रकैद खत्म हो चुकी है, लेकिन वे अब भी जेल में बंद हैं।
