उत्तरप्रदेश के हाथरस में एक दलित लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार और हत्या के बाद हुई पुलिसिया कार्रवाई को लेकर जम कर हंगामा बरपा है। आमलोग से लेकर विपक्षी दल, सोशल मीडिया से सड़क तक इस मुद्दे पर यूपी सरकार की आलोचना कर रहे हैं। आलोचना की वजह रात में अंधेरे के वक़्त पीडिता का अंतिम संस्कार करना और उसके बाद विपक्षी नेताओं और मीडिया की एंट्री बैन करना है।
सरकार और हाथरस पुलिस के रोक के बावजूद कई दलों के नेता भारी संख्या में हाथरस पहुंचे थे। अब इस मामले में राज्य की योगी सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। कोरोना काल मे भीड़ जमा करने और रोक के बाद भीड़ लगाने की वजह से हाथरस में सीआरपीसी की धारा 144 का उल्लंघन करने के लिए भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद और 400-500 अज्ञात लोगों के खिलाफ आईपीसी और महामारी रोग अधिनियम में FIR दर्ज की गई।
आपको बता दें कि इस मामले में सीबीआई जांच के आदेश दिए गए हैं। इससे पहले यह जांच एसआईटी को सौंपी गई थी। वहीं राज्य सरकार ने जिले के एसपी समेत पांच पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया था। इसके अलावा राज्य के अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी, डीजीपी के साथ पीड़िता के परिवार से भी मिलने पहुंचे थे। किरकिरी होता देख सरकार ने बाद में मीडिया और विपक्षी दलों को भी परिवार से मिलने की इजाजत दे दी थी।
