जन सुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर के चुनाव न लड़ने के फैसले ने बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है। भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने पटना में प्रचार के दौरान चुटकी लेते हुए कहा, “जनरल भाग गया, अब फौज का क्या होगा?” — इशारा साफ़ था, लड़ाई से पहले ही मैदान छोड़ने की बात पर।
किशोर ने कल साफ़ किया कि वे इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगे और संगठन को मज़बूत करने पर ध्यान देंगे। उन्होंने दावा किया कि एनडीए की हार तय है और नीतीश कुमार 25 से ज़्यादा सीटें भी नहीं जीत पाएंगे। साथ ही कहा, “जन सुराज के लिए 150 से कम सीटें जीतना हार के बराबर होगा।”
भाजपा ने उनके फैसले पर तंज कसते हुए कहा कि “बिज़नेसमैन किशोर” ने हालात देखकर मैदान से हटने का फैसला लिया। भाजपा प्रवक्ता शहज़ाद पूनावाला ने कहा, “किशोर समझ गए हैं कि ज़मीनी स्थिति उनके पक्ष में नहीं है, हार गए तो उनका ‘पॉलिटिकल बिज़नेस’ भी खत्म हो जाएगा।”
अब सवाल यही है — रणनीति के महारथी कहे जाने वाले प्रशांत किशोर का राजनीति से कदम पीछे हटाना रणनीति है या हार का डर? बिहार की जंग का जवाब 14 नवंबर को मिलेगा।
