एमसीडी बिल पर अमित शाह:तीनों नगर निगमों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही दिल्ली सरकार, लोकसभा में बोले केंद्रीय गृहमंत्री

दिल्ली नगर निगम (संशोधन) विधेयक-2022 जिसका उद्देश्य दिल्ली के तीन नगर निगमों को “एकल, एकीकृत और अच्छी तरह से सुसज्जित इकाई” में एकीकृत करना है, बुधवार को लोकसभा में ध्वनिमत से पारित किया गया।

दिल्ली नगर निगम अधिनियम-1957 में संशोधन करने वाला विधेयक एक गरमागरम बहस के बाद पारित किया गया जिसमें 20 सदस्यों ने भाग लिया। विधेयक पर बहस का जवाब देते हुए, गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के इस आरोप को खारिज कर दिया कि “केंद्र संघीय ढांचे का अतिक्रमण कर रहा है और राज्यों के अधिकारों को छीन रहा है”।

शाह ने कहा, “मैं सदन के सामने यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि मैंने इस विधेयक को अनुच्छेद 239एए के तहत दी गई शक्तियों के तहत लाया है। उन्होंने कहा कि केंद्र यह विधेयक इसलिए लाया क्योंकि दिल्ली एक केंद्र शासित प्रदेश है। उन्होंने कहा कि केंद्र गुजरात या बंगाल में ऐसा कोई विधेयक नहीं ला सकता है, उन्होंने कहा कि विधेयक “पूरी तरह से संवैधानिक” है।

शाह ने कहा, ‘एक बड़ी गलतफहमी फैलाने की कोशिश की जा रही है, मैं इसे पूरी तरह खारिज करता हूं। इससे पहले दिन में, सदन के विचार के लिए विधेयक पेश करते हुए, शाह ने कहा कि दिल्ली सरकार दिल्ली के तीनों नगर निगमों के साथ “सौतेला व्यवहार” कर रही है।

विपक्ष के इस आरोप को खारिज करते हुए कि विधेयक राजनीतिक उद्देश्यों से लाया गया है, शाह ने स्पष्ट किया कि विधेयक का उद्देश्य मौजूदा व्यवस्था में सुधार लाना है। शाह ने कहा, ‘इसके अलावा और कोई मकसद नहीं है। बहस की शुरुआत करते हुए, कांग्रेस सदस्य मनीष तिवारी ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि यह संसद की विधायी क्षमता से परे है।

तिवारी ने कहा, “अगर कोई सदन इस कानून में संशोधन करने के लिए विधायी क्षमता रखता है, तो वह दिल्ली विधानसभा है। एमसीडी के एकीकरण के बाद वार्डों के परिसीमन के संबंध में विधेयक के प्रावधानों का जिक्र करते हुए, तिवारी ने गृह मंत्री से जानना चाहा कि परिसीमन के लिए किस डेटा का उपयोग किया जाएगा।

उन्होंने पूछा, “क्या अगले दो साल में दिल्ली में नगर निगम का गठन नहीं होगा? उनके सहयोगी अधीर रंजन चौधरी ने भी सरकार पर निशाना साधा। चौधरी ने कहा, “इस विधायी दस्तावेज की जड़ स्पष्ट रूप से इंगित करती है कि यह सरकार सहकारी संघवाद को कमजोर करते हुए राज्य के अधिकार क्षेत्र पर अतिक्रमण करने पर तुली हुई है।

डीएमके सांसद डॉ वीरास्वामी कलानिधि ने इस विधेयक को लाने की तात्कालिकता पर सवाल उठाया। विधेयक का विरोध करते हुए, टीएमसी सदस्य महुआ मोइत्रा ने कहा कि यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 243यू का उल्लंघन है और दिल्ली में नगरपालिका चुनाव कराने में देरी हो रही है।

विपक्ष के इस आरोप पर कि भाजपा इस विधेयक को इसलिए लाई क्योंकि पार्टी आम आदमी पार्टी की हालिया चुनावी जीत को देखते हुए एमसीडी चुनावों का सामना करने से डरती है, शाह ने कहा, “भाजपा कार्यकर्ताओं को किसी से डरने की जरूरत नहीं है।

हमने चार राज्यों में सरकारें बनाई हैं और हमें पूरा भरोसा है कि जहां भी चुनाव होंगे हम मोदी जी के नेतृत्व में जीतेंगे। बसपा सदस्य कुंवर दानिश अली ने कहा, “सरकार देश के संघीय ढांचे पर लगातार हमले कर रही है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने परिसीमन के बहाने जम्मू-कश्मीर में चुनाव नहीं कराए और दिल्ली में भी यही पैटर्न दोहराया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर में चुनावों के संबंध में विपक्षी सदस्यों द्वारा की गई टिप्पणियों का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि चुनाव परिसीमन के बाद होंगे। “हमे राष्ट्रपति शासन लेन का कोई शौक नहीं है। (हम राष्ट्रपति शासन नहीं लगाना चाहते), शाह ने कहा। 

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