लखीमपुर के बाद अब आगरा बना राजनीति का केंद्र, जानें वजह

आगरा के जगदीशपुरा थाने के मालखाने से 25 लाख रुपये चुराने के आरोप में पुलिस ने सफाई कर्मचारी अरुण वाल्मीकि को हिरासत में लिया था जहां अरुण की मौत हो गई। इस मामले में प्रशासन ने बुधवार को पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा और परिवार के एक व्यक्ति को नौकरी देने की घोषणा की है।

वहीं, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने बुधवार को आगरा पहुंचकर उनके परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी। आगरा में मृतक के परिवार से मिलने के बाद कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने कहा, “मैं अरुण वाल्मीकि के परिवार से मिली। मुझे विश्वास नहीं हो रहा है कि इस सदी में किसी के साथ भी ऐसा हो सकता है।

उन्होंने मुझे बताया है कि वाल्मीकि समुदाय के 17-18 लोगों को अलग-अलग जगहों से उठाकर थाने ले जाया गया।” प्रियंका ने आगे कहा “उन्हें बेरहमी से पीटा गया। जो मुझसे कहा गया था, मैं वह भी नहीं कह सकती। पत्नी के सामने अरुण को पीटा गया।

रात के करीब 2 बजे उसके भाई उससे मिले और वह उस समय ठीक था। करीब 2.30 बजे उन्हें बताया गया कि वह मर चुका है। परिवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी नहीं दी गई।” नेता ने दावा किया कि अरुण वाल्मीकि को इलेक्ट्रिक शॉक देकर मारा गया है।

उन्होंने कई ट्वीट कर भी भाजपा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार और पुलिस पर निशाना साधा। ट्वीट में प्रियंका ने लिखा ”किसी को पुलिस हिरासत में पीट-पीटकर मार देना कहां का न्याय है? आगरा पुलिस की हिरासत में अरुण वाल्मीकि की मौत की घटना निंदनीय है।

भगवान वाल्मीकि जयंती के दिन उत्तर प्रदेश सरकार ने उनके संदेशों के खिलाफ काम किया है। मामले में उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए और आरोपी पुलिस वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए। पीड़ित परिवार को मुआवजा मिलना चाहिए।” 

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