मध्य प्रदेश में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघर के बयान — “आदिवासी हिंदू नहीं हैं” — ने नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। छिंदवाड़ा में जनजातीय विकास परिषद और करमदार पूजा के कार्यक्रमों में बोलते हुए कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि बीजेपी और आरएसएस आदिवासी समुदायों पर जबरन हिंदू पहचान थोपना चाहती हैं।
सिंघर ने कहा, “हमारी अपनी परंपराएं, संस्कृति और जीवनशैली है। हम पेड़, फसल और प्रकृति की पूजा करते हैं, तो इसमें भाजपा को दिक्कत क्यों है?” उन्होंने दावा किया कि आदिवासी देश के मूल निवासी हैं और आरएसएस उनकी परंपराओं को खत्म करना चाहता है।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका बयान किसी धर्म के विरोध में नहीं है। “मैं स्वयं हिंदू धर्म को मानता हूं, लेकिन भाजपा अपने एजेंडे के तहत काम कर रही है। आज तक कोई आदिवासी आरएसएस का सरसंघचालक नहीं बना,” उन्होंने कहा।
इस बयान पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। केंद्रीय जनजातीय मामलों के राज्य मंत्री दुर्गादास उइके ने इसे सामाजिक एकता के लिए “हानिकारक” बताया और उमंग सिंघर से माफी की मांग की।
“ऐसे बयानों से समाज में फूट डालने की कोशिश की जा रही है। उन्हें आदिवासी समाज से माफी मांगनी चाहिए,” उइके ने कहा।
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में देश की सबसे बड़ी आदिवासी आबादी है — करीब 21%। विधानसभा की 230 सीटों में से 47 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं, जिससे आदिवासी राजनीति बेहद प्रभावशाली बन गई है।
