बिहार में चल रही विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत चुनाव आयोग ने चौंकाने वाले आंकड़े जारी किए हैं। अब तक की जांच में 52.30 लाख मतदाता अपने पते पर नहीं पाए गए हैं। इनमें से 18.66 लाख मतदाता मृत घोषित किए गए हैं, 26.01 लाख मतदाता अन्य विधानसभा क्षेत्रों में स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके हैं, जबकि 7.50 लाख मतदाता दो जगहों पर दर्ज हैं। 11,484 मतदाता पूरी तरह से अज्ञात पाए गए हैं।
24 जून 2025 तक बिहार में कुल 7.89 करोड़ मतदाता दर्ज थे, जिनमें से 7.16 करोड़ से अधिक लोगों के एन्यूमरेशन फॉर्म (EF) मिल चुके हैं। 7.13 करोड़ फॉर्म्स को डिजिटल रूप से दर्ज भी किया जा चुका है, जो कुल का 90.37% है। शेष 21.35 लाख फॉर्म अब भी लंबित हैं।
1 अगस्त से 1 सितंबर 2025 तक, आम नागरिक ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने, हटाने या सुधार करवाने के लिए आपत्ति दर्ज कर सकते हैं।
चुनाव आयोग, जिला निर्वाचन अधिकारी, बीएलओ और सभी 12 प्रमुख दलों के प्रतिनिधि मिलकर इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने में जुटे हैं। यह पहल आगामी चुनावों में निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
