बारिश और हरियाणा के हथिनी कुंड बैराज से लगातार पानी छोड़े जाने के बाद दिल्ली में यमुना का जलस्तर बढ़ने से नदी एक बार फिर उफान पर है।
आईटीओ पर यमुना का बहाव काफी ज्यादा तेज है और जलस्तर खतरे के निशान से काफी ऊपर पहुंच गया है जिसकी वजह से दिल्ली के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।
बढ़ते जलस्तर को देखते हुए लोहे का पुल बंद कर दिया गया है और मौसम विभाग ने नदी से सटे इलाकों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया है, मानना है कि दिल्ली में अगले कुछ दिनों तक बारिश इसी तरह होती रहेगी।
अनुमान है कि अगर पानी इसी रफ्तार से बढ़ता रहा तो दिल्ली के निचले इलाके बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं। रविवार सुबह 8 बजे यमुना का जलस्तर 205.28 मीटर पहुंचा जबकि ख़तरे का निशान 205.33 मीटर है। 24 घंटे में इसके खतरे के निशान तक पहुंचने का अनुमान जताया जा रहा है।
शनिवार को जलस्तर खतरे के निशान से नीचे आकर लगातार घट रहा था लेकिन दिल्ली-एनसीआर में बारिश के बाद से यह फिर से लगातार बढ़ रहा है। राजधानी में यमुना के तटीय इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है।
ऐसे में सवेरे से हो रही बारिश के चलते कई इलाकों में जल-जमाव की स्थिति पैदा हो गई है जिससे जाम के हालात पैदा हो सकते हैं। हालांकि बारिश के कारण, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक, दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 57 रहा।
इसके अलावा फरीदाबाद की हवा 48, गाजियाबाद 57, ग्रेटर नोएडा 49, गुरुग्राम 56 और नोएडा की हवा 50 एक्यूआई के साथ दर्ज हुई।
यमुनाबाजार इलाके में पुल के नीचे कई फीट पानी भरने से कारें और अन्य वाहनों को परेशानी हुई। यमुनाबाजार इलाके में पुल के नीचे कई फीट पानी भरने से कारों और अन्य वाहनों को परेशानी हुई।
मानसून की सक्रियता के बाद राजधानी में अमूमन हर रोज तेज या छिटपुट बारिश देखने को मिल रही है जिससे जलभराव की स्थिति होने के कारण कई जगह सड़कों के धंसने से कई फीट गहरे गड्ढे से हादसे होने की संभावनाएं बन रही है।
आईआईटी फ्लाईओवर के नीचे शनिवार को ऐसी ही स्थिति के कारण 10-15 फीट सड़क अचानक धंसने से कई फीट गहरा गड्ढा हो गया।
जलप्रवाह बीते 24 घंटे में 1.60 लाख क्यूसेक दर्ज की गई है जो साल का सबसे अधिक स्तर है। दिल्ली में पिछले मंगलवार को रिकॉर्डतोड़ बारिश हुई थी। कुछ इलाकों में 100 मिलीमीटर से भी ज्यादा बारिश दर्ज की गई थी।
एक दशक में यह तीसरी बार है, जब यहां 100 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई हो। यह 2013 के बाद का सबसे बड़ा रिकॉर्ड था। अब तक सबसे बड़ा रिकॉर्ड 266.2 एमएम का है, जो 1958 में 21 जुलाई को दर्ज हुई थी।
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