कोरोना वायरस की दूसरी लहर से मचे हाहाकार के बाद ऑक्सीजन की कमी से होने वाली मौत का मामला सुर्खियों में है। केंद्र सरकार ने कहा कि सभी राज्यों से इस मामले में मांगी गई जानकारी में सिर्फ एक राज्य ने अब कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कमी के चलते संदिग्ध मौत की जानकारी दी है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने एक प्रेंस कॉन्फ्रेन्स में जवाब देते हुए कहा कि “जब संसद में सवाल उठाया गया था, तो राज्यों से विशेष रूप से यह सवाल पूछा गया था कि क्या ऑक्सीजन से संबंधित मौतें हुई हैं? अब तक हमें मिली रिपोर्टों के मुताबिक, एक राज्य ने एक संदिग्ध मामले का जिक्र किया है, अन्य राज्यों ने नहीं बताया कि ऑक्सीजन की कमी के चलते कोई मौत हुई है।” अग्रवाल ने आगे बताया कि “पूरे देश को ऑक्सीजन से जुड़ी अपनी तरह की चुनौती का सामना करना पड़ा। इसकी मांग 2,000-3,000 मीट्रिक टन से बढ़कर 9,000 मीट्रिक टन तक हो गई। यह देखा गया कि कैसे लोग, राज्य और केंद्र हर लेवल पर मेडिकल ऑक्सीजन की सप्लाई बढ़ाने के लिए जुड़ गए। हमने मेडिकल ऑक्सीजन के उपयोग के लिए इंडस्ट्री की ऑक्सीजन का इस्तेमाल किया। हमने ऑक्सीजन कंसंट्रेटर दिए, पीएसए प्लांट्स का काम बढ़ाया और ऑक्सीजन के ट्रांसपोर्टेशन के लिए रेलवे और नौसेना का भी इस्तेमाल किया। हमें एक बहुत बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा।”
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस सवाल पर, अरुणाचल प्रदेश, असम, ओडिशा, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, झारखंड, हिमाचल प्रदेश और पंजाब समेत 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने इस पर जवाब दिया है जिसमें सिर्फ पंजाब ने अपने यहां 4 लोगों की संदिग्ध मौत की जानकारी की पुष्टि की है। 12 राज्यों ने ऐसा एक भी मामला उनके यहां दर्ज नहीं होने की जानकारी दी है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि पिछले 26 जुलाई को सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र भेजकर पूछा गया था कि ऑक्सीजन की कमी से अब तक कितने लोगों की मौत हुई है? जिसमें पंजाब में चार संदिग्ध मौतों के अलावा 12 राज्यों ने एक भी मौत दर्ज नहीं होने की जानकारी दी है।
बता दें कि केंद्र सरकार ने पिछले महीने भी संसद में कहा था कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा विशेष रूप से ऑक्सीजन की कमी के चलते कोई मौत दर्ज नहीं हुई है। सरकार ने कहा था कि राज्यों ने इसे लेकर कोई डेटा मुहैया नहीं कराया है जिसके बाद से विपक्षी दल सरकार पर हमलावर थे। इसके बाद केंद्र ने दोबारा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से साल की शुरुआत में आई कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कमी से मौतों का डेटा मांगा था।
सरकार के इस दावे पर सवाल उठाने में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया शामिल हैं जिन्होंने कहा था कि केन्द्र ने दिल्ली सरकार से ऑक्सीजन की कमी के कारण शहर में मरीजों की हुई मौत के बारे में कोई जानकारी नहीं मांगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन का संकट था लेकिन बिना जांच यह सुनिश्चित करना संभव नहीं है कि इसकी कमी के कारण कोई मौत हुई या नहीं।
