हाथरस गैंगरेप केस को लेकर पूरे भारत में गुस्सा बढ़ता ही जा रहा है. विपक्षी पार्टियां और सामजिक संगठन पीड़िता को इन्साफ दिलाने के लिए सड़कों पर उतर आये है. जगह-जगह विरोध प्रदर्शन चल रहे है. सरकार और पुलिस की भूमिका को लेकर पहले ही सवाल उठाये जा रहे है.
इसी बीच हाथरस के 12 गावों ने एक ऐसा फैसला लिया है जिसके चलते सरकार और पुलिस की मुसीबत और भी ज्यादा बढ़ने वाली यही. दैनिक भास्कर में छपी एक खबर के अनुसार शुक्रवार को हाथरस में ठाकुरों-ब्राह्मणों की रात को गुपचुप तरीके से पंचायत हुई जिसमें सर्वसम्मति से ये फैसला लिया गया की सब मिलकर आरोपियों की रिहाई की मांग करेंगे. उनका कहना है की ठाकुरों-ब्राह्मणों को नीचा दिखने और छवि खराब करने के लिए यह मामला उछला जा रहा है.
पंचायत ने इस बात पर भी ज़ोर दिया की मेडिकल रिपोर्ट में रेप की पुष्टि नहीं हुई है. राजनीति चमकाने के लिए कुछ पार्टिया अपनी राजनीति चमकाने के लिए इस केस को हवा दे रही यही. यही नहीं, उन्होंने इस केस की मांग CBI से करवाने की मांग राखी और इस केस से जुड़े सभी लोगों का नार्को टेस्ट करवाने की बात भी कही. पंचायत ने यह ऐलान भी किया है की जब तक यह मामला सुलझ नहीं जाता, वह गांव में किसी भी बाहरी व्यक्ति को घुसने नहीं देंगे. पंचायत में तो इस बात को भी उठाया गया की लड़की के मर्डर के पीछे उसके परिवार का ही हाथ है.
पंचायत के इस ऐलान से स्तिथि और भी खराब होती नज़र आ रही है क्यूंकि उस इलाके में गिने चुने ही दलितों के परिवार है और इस ऐलान से वह अलग-थलग पड़ जाएंगे. पीड़िता का परिवार पहले ही जान का खतरा बताकर सुरक्षा की गुहार लगा चुका है.
वहीँ मामले की गंभीरता को समझते हुए योगी सरकार ने पहले ही वहाँ भारी पुलिस बल की तैनाती की हुई है.
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