दिल्ली नगर निगम में आम आदमी पार्टी को लगा बड़ा झटका, 38 पार्षदों ने छोड़ा AAP का साथ

दिल्ली नगर निगम में आम आदमी पार्टी की पकड़ दिन-ब-दिन कमजोर होती जा रही है। सत्ता में होने के बावजूद पार्टी की केंद्रीकरण की नीति और पार्षदों की अनदेखी अब पार्टी पर भारी पड़ने लगी है। वर्ष 2022 में बहुमत से जीतने के बाद भी AAP ने न तो वार्ड समितियों के चुनाव कराए और न ही विशेष समितियों की संरचना पर ध्यान दिया, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष लगातार गहराता गया।

इन नीतियों से नाराज़ होकर अब तक 38 पार्षद पार्टी का दामन छोड़ चुके हैं। स्थानीय स्तर पर फैसलों में पार्षदों की भूमिका को नजरअंदाज कर पार्टी हेडक्वार्टर की दखलअंदाजी से गुस्साए नेताओं ने इस्तीफा दे दिया। हाल ही में 15 नाराज पार्षदों ने न केवल पार्टी छोड़ी, बल्कि मिलकर एक नई राजनीतिक पार्टी ‘इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी’ का गठन भी कर लिया है।

इस टूट के चलते ‘आप’ को रोहिणी, दक्षिणी और पश्चिमी जोन जैसे अहम क्षेत्रों में भारी नुकसान उठाना पड़ा है। भाजपा से मुकाबले की रणनीति बनाते समय AAP अब खुद अपने ही फैसलों की कीमत चुका रही है।

पार्टी से इस्तीफा देने का कारण
आप के पूर्व पार्षद मुकेश गोयल ने कहा, “हम 2022 में आम आदमी पार्टी से चुनाव जीतकर आए थे। नगर निगम में 250 सीटों में से 135 सदस्य हमारे थे। क्या कारण रहा कि यह सदस्य धीरे धीरे 90 के पास पहुंच गए? ढ़ाई साल सत्ता में रहने का बाद हमने काम नहीं किया, कोई बजट नहीं मिला,संसाधन नहीं, निगम पार्षद का फंड नहीं मिला। हर तरह से हमारे पार्षद परेशान हैं। क्षेत्र में जनता सवाल पूछती है…हमारा नेतृत्व परवाह करने को तैयार नहीं…”

आप के पूर्व पार्षद साहिब कुमार ने कहा, “हम उस पार्टी में रहकर बहुत पीड़ित थे, क्योंकि जब हम बोलते थे, तो हमारी कहीं सुनवाई नहीं थी। हम सभी जनता से जुड़े हुए हैं और उनसे वादा किया था कि चुनाव जीतने के बाद हम उनके कल्याण के लिए कड़ी मेहनत करेंगे। लेकिन वह काम नहीं हो रहे थे…”

AAP पूर्व पार्षद अशोक पांडे ने कहा, “हमने पार्टी छोड़ने का फैसला इसलिए किया क्योंकि हमें आम आदमी पार्टी में शामिल हुए 2 से 2.5 साल हो गए हैं, हम बड़ी उम्मीदों के साथ सकारात्मक बदलाव की उम्मीद लेकर आए थे। केजरीवाल जी अच्छा काम कर रहे थे लेकिन हमें नगर निगम में बहुत दिक्कतें आईं। काम करने के लिए कोई साधन नहीं मिला…”
AAP पूर्व पार्षद हिमानी जैन ने कहा,” हिमानी जैन ने कहा कि पिछले ढाई सालों में निगम में कोई काम नहीं हुआ, जबकि वे सत्ता में थे। इसीलिए उन्होंने विकास के उद्देश्य से नई पार्टी बनाई है और अब वही पार्टी उनका समर्थन पाएगी जो वास्तव में दिल्ली के विकास के लिए काम करेगी ।

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