पाकिस्तान में कई फ़ीसदी बढ़ी बेरोजगारी दर

पाकिस्तान की खराब आर्थिक हालात और कोरोना महामारी के चलते बेरोजगारी दर अपने उच्चतम स्तर, 16 फीसदी के पार पहुंच गई है। इमरान खान की सरकार इस मोर्चे पर भी बुरी तरह फेल हुई है।

जानकारी के अनुसार सोमवार को पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट इकोनॉमिक्स (पीआईडीई) के द्वारा पेश आंकड़ों के अनुसार देश में बेरोजगारी दर 16 फीसदी तक पहुंच गई है, जो इमरान खान के नेतृत्व वाली पाककिस्तान सरकार के 6.5 फीसद के दावे के विपरीत है।

पीआईडीई ने बेरोजगारी की बढ़ती दर की एक गंभीर तस्वीर को उजागर करते हुए आगे बताया कि देश में इस समय कम-से-कम 24 फीसदी शिक्षित बेरोजगार हैं। योजना और विकास पर सीनेट की स्थायी समिति को अपनी ब्रीफिंग में पीआईडीई ने बताया कि देश भर में 40 फीसदी शिक्षित महिलाएं(स्नातक से कम या स्नातक) भी बेरोजगार थीं।

पाकिस्तान के अखबार डॉन में छपा कि हालात इतने खराब हैं कि हाईकोर्ट में निकली चपरासी की नौकरी के लिए 15 लाख लोगों द्वारा आवेदन किया गया है। जिन लोगों ने इस नौकरी के लिए आवेदन किया, उनमें एमफिल डिग्री धारक भी शामिल हैं।

पीआईडीई के अधिकारियों ने कहा कि सरकार के स्तर पर कोई शोध नहीं किया जा रहा है, बल्कि इस तरह के सभी अध्ययन विदेशों से किए गए।

समिति ने बात रखी कि देश में कई शोध संस्थान चल रहे हैं, लेकिन शोध के उद्देश्य पूरे नहीं हो रहे हैं। वहीं, पाकिस्तान की इमरान सरकार का दावा है कि देश में बेरोजगारी दर 6.9 फीसदी है।

पाकिस्तान की सांख्यिक ब्यूरो (पीबीएस) द्वारा प्रकाशित श्रम बल सर्वेक्षण (एलएफएस) के अनुसार, 2017-18 में देश की बेरोजगारी 2018-19 में बढ़कर 6.9 फीसदी हो गई है। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के सत्ता में आने के पहले वर्ष में पुरुषों और महिलाओं में बेरोजगारी की वृद्धि देखी गई।

पुरुष बेरोजगारी दर जहां 5.1 फीसदी से बढ़कर 5.9 फीसदी तो वहीं महिला बेरोजगारी दर 8.3 फीसदी से बढ़कर 10 फीसदी हो गई। इनमें बहुत से लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने बेहतर नौकरी की चाहत में एमफिल जैसे कोर्स में दाखिला लिया है। इन लोगों के आंकड़े शामिल किए जाने के बाद ये बेरोजगारी दर और ज्यादा हो जाती है।

इन सब के अलावा पाकिस्तान की इमरान सरकार आतंकियों के वित्तपोषण के मामले में एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट का भी सामना कर रही है। इस सरकार के कार्यकाल में आतंकी गतिविधियों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। वहीं इस समय पाकिस्तान सरकार का पूरा ध्यान तालिबान को समर्थन देने की ओर ज्यादा देखा जा रहा है।

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