चीन नहीं देना चाहता अपने लोगों को कोरोना की दवा, जानिये वजह

कोरोना महामारी से पूरी दुनिया त्रस्त है. पूरा विश्व चाहता है की इसकी वैक्सीन जल्द से जल्द खोज ली जाए ताकि दुनिया में हो रहे जान-माल के नुक्सान को रोका जा सके. वैक्सीन को सबसे पहले बनाने की होड़ पूरे विश्व में चल रही है. कभी इस रेस में ऑक्सफ़ोर्ड तो कभी रूस तो कभी चीन आगे निकलता दिखाई देता है. मगर WHO की माने तो कोरोना की वैक्सीन अभी दूर की कोड़ी दिखाई देती है.

इन सबके बीच चीन से एक बयान सामने आया है जो आपको हैरान कर सकता है. चीन के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन (CDC) के डायरेक्टर डॉ गाओ फू के मुताबिक कोरोना की वैक्सीन आने पर चीन अपने देश में बड़े स्तर पर टीकाकरण अभियान नहीं चलाएगा क्योंकि बिना दवाई के ही वह कोरोना की रोकधाम करने में काफी हद तक सफल रहा है. वैक्सीन प्राथमिकता के तौर पर सबसे पहले मेडिकल स्टाफ, कोरोना वायरस होस्टपॉट्स में काम कर रहे लोगों, विदेशों में काम करने वाले चीनी नागरिकों, स्कूल और कॉलेज के छात्रों और स्वास्थय कर्मचारियों को दी जाएगी. उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया की बड़े स्तर पर टीकाकरण की व्यापक आवश्यकता तब ही होगी जब चीन में वुहान की तरह कोरोना का कोई दूसरा बड़ा ऑउटब्रेक होगा.

एक्सपर्ट्स चीन के इस बयान को अलग अलग तरीके से देख रहे है. कुछ का कहना है की चीन इस थ्योरी पर काम कर रहा है की अगर कल को वैक्सीन से कोई नुक्सान होता है तो वह कम से कम होगा क्यूंकि कोरोना की वैक्सीन के मानव शरीर में लम्बे समय तक क्या प्रभाव रहेंगे ये कोई नहीं जानता और दूसरी है आर्थिक वजह. चीन की आबादी को देखते हुए वेक्सिनेशन का खर्च अरबों में जा सकता है. वहीँ कुछ लोग मानते है की चीन दुनिया में सबसे पहले कोरोना की दवाई बनाकर दुनिया में बेचकर पैसा कमाना चाहता है.

आपको बतादें कि फिलहाल चीन में कोरोना के मामले न के बराबर हैं. चीन में कोरोना वायरस के कुल मामलों की संख्या 90,107 ही है. पिछले 24 घंटो में चीन में केवल 29 मामले ही सामने आये है और एक भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई है.

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