सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि सरकार वह कर रही है जो नेहरू नहीं कर सकते थे क्योंकि उन्होंने अदालत में कांग्रेस नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल के तर्क का जवाब दिया था – पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कहा था कि यह प्रावधान अप्रिय है और जितनी जल्दी हम राजद्रोह से छुटकारा पा लें, उतना अच्छा है’।
यह आदान-प्रदान तब हुआ जब भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया, तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा और अन्य द्वारा राजद्रोह कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
“आप सही कह रहे हैं, सर। नेहरू जी अदालत में झूठ नहीं बोल सकते थे, देशवासियों की जासूसी नहीं कर सकते थे, निर्दोषों को गिरफ्तार कर सकते थे, असंतुष्टों को बिना किसी प्रक्रिया के बंद कर सकते थे। सूची लंबी है, ”महुआ मोइत्रा ने अदालत के अंदर मेहता की टिप्पणी का जवाब देते हुए ट्वीट किया।
कोर्ट में बहस के दौरान कपिल सिब्बल ने सॉलिसिटर जनरल मेहता की टिप्पणी पर पलटवार करते हुए कहा, “नहीं, बिल्कुल नहीं ,आप ऐसा नहीं कर रहे हैं,आप कानून का समर्थन कर रहे हैं। आप कह रहे हैं कि सब अच्छा है मिस्टर मेहता।” “स्नेह का निर्माण नहीं किया जा सकता है।
जब तक हिंसा के लिए कोई उत्तेजना न हो, तब तक व्यक्ति को असंतोष व्यक्त करने के लिए स्वतंत्र होना चाहिए। मैं इसे सरकार के प्रति अप्रभावित रहने के लिए एक गुण मानता हूं,” सिब्बल ने कहा।
सुप्रीम कोर्ट ने आखिरकार लंबित राजद्रोह के मामलों को तब तक स्थगित रखने पर केंद्र का रुख मांगा जब तक कि केंद्र कानून की फिर से जांच नहीं करता जैसा कि केंद्र ने अपने हलफनामे में प्रस्तुत किया था।
केंद्र ने पहले कहा था कि उसने “उपयुक्त मंच” द्वारा राजद्रोह कानून की “पुन: जांच और पुनर्विचार” करने का फैसला किया हैं। केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रालय से पुराने राजद्रोह कानून को हटाने का आग्रह किया। भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए देशद्रोह को अपराध बनाती है जो एक गैर-जमानती अपराध हैं।
