हाथरस मामले पर जहां एक और सारा देश पीड़िता को इन्साफ दिलाने की लड़ाई लड़ रहा है वहीँ दूसरी तरफ बीजेपी के नेताओं विवादित बयान रुकने का नाम नहीं ले रहे है.
अब नवाबगंज से नगर पालिका परिषद के चेयरमैन रंजीत श्रीवास्तव का विवादित बयान सामने आया है. रंजीत श्रीवास्तव ने तो पीड़िता के चरित्र पर ही सवाल खड़ा कर दिया. आखिर वह क्या करने खेत में गई थी. सरकार को 25 लाख के मुआवज़े पर फिर से विचार करना चाहिए.
मीडिया से बात करते हुए रंजीत श्रीवास्तव ने कहा “मैं बड़े दु:ख के साथ कहना चाहूंगा कि जिस तरह से घटनाक्रम हुआ और एक कांग्रेस नेता के आने के बाद से बयान बदले गए. यह एक सोची समझी साजिश है. लेकिन मैं इसपर न जा कर मूल बात पर आना चाहूंगा कि पूरा देश और हर जांच एजेंसी इस बात पर गौर करे कि आज जब बाजरे की फसल कटाई हो गई है. खेत सूखा है तो बाजरे के खेत में ऐसी कौन सी घास थी जिसको काटने यह लड़की मां-भाई को छोड़कर चली गई. कौन सी घास थी ये बहुत बड़ा सवाल है. गांव-देहात के अंदर इन लड़कियों को जब अकेले में घास काटनी होती है तो इनको गन्ने का खेत, मक्के का खेत, अरहर और बाजरे का खेत मिलता है.”
इससे पहले उत्तर प्रदेश के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री अजीत सिंह पाल के बयां ने भी आग में घी डालने का काम किया था. मीडिया से बात करते हुए उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया था की हाथरस में पीड़िता के साथ बलात्कार हुआ है. उन्होंने कहा ‘‘डॉक्टरों ने साफ कर दिया है कि हाथरस की घटना में महिला के साथ दुष्कर्म नहीं हुआ.’’
वहीँ बलिया से बीजेपी के MLA सुरेंद्र सिंह ने भी मीडिया से बातचीत करते हुए सभी माता-पिता से अपील की थी की अपनी जवान लड़कियों को सही संस्कार दे ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके.
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