चुनावी मौसम में पोस्टर वॉर, एनडीए के पोस्टर पर नीतीश मोदी साथ, राजद में तेजस्वी का दिख रहा चेहरा, लालू गायब

बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियां जोरों अपर हैं। कोरोना काल मे रैली और सीधे प्रत्यक्ष जनसंवाद बेशक कम हुए हैं लेकिन सोशल मीडिया पर एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ लगी है।

बिहार विधानसभा चुनाव- तेजस्वी बोले-अभी बिहार-बिहार करेंगे, चुनाव होते ही भूल जाएंगे

बिहार में चुनावी सरगर्मियों के बीच राजनीतिक तपन तेजी से बढ़ रही है। एक तरफ जहां सरकार वादे, यादें, शिलान्यास और उद्घाटन से जनता को विकास और अपनी कामयाबी की बातें बताने में जुटी है वहीं दूसरी तरफ विपक्ष लगातार हमलावर है। खास कर कृषि संबंधित बिल ने जैसे विपक्ष को संजीवनी दे दी है और इसको लेकर सरकार को लगातार तीखे सवालों का सामना करना पड़ रहा है।

पटना में पोस्टर लगा लिखा- एक ऐसा परिवार जो बिहार पर भार, लालू को बताया कैदी नंबर 3351

बिहार में बढ़ी चुनावी सरगर्मियों के बीच राजनीतिक दलों में जुबानी जंग के साथ पोस्टर वार एक बार फिर तेज होता नजर आ रहा है। एक तरफ जहां सोशल मीडिया पोस्ट और मीडिया के माध्यम से, भाषणों के माध्यम से आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे, सफलता-विफलता बताई जा रही है वहीं दूसरी तरफ पोस्टरों के माध्यम से भी हमला बोला जा रहा है।

सुशील मोदी बोले- बिहार के लोगों को पलायन करने में आता है मजा, राजद ने कहा- शर्म करो

कोरोना काल मे शहरों से अपने गांव लौटते मजदूरों को देख किसे उनकी स्थिति पर तरस नही आया होगा। कौन इनकी बदकिस्मती पर न रोया होगा लेकिन एक सत्ता में बैठे लोग हैं जिन्हें न अपने बयानों के लिए खेद होता है और न ही अपने कुछ न करने का अफसोस। यही वजह है कि बड़ी ही आसानी से बिहार के डिप्टी सीएम सुशील मोदी यह कह गए कि बिहार के लोगों को पलायन करने में मजा आता है?

जारी है बिहार में विधायकों को खदेड़ने का सिलसिला, जनता मांग रही हिसाब, विधायक कर रहे वादे, पढ़ें

5 साल तक चुनाव जीत नदारद रहने वाले विधायकों की राह इस बार बिहार विधानसभा चुनाव में मुश्किल नजर आ रही है। लोकलुभावन वादे कर जीतने वालों से अब जनता हिसाब मांग रही है। क्षेत्रीय समस्याओं पर लोगों के गुस्से का सामना अभी तक बिहार में कई विधायक कर चुके हैं।

बिहार चुनावों से पहले जानें किन दलों को मिला नया चुनाव चिन्ह, पप्पू को कैंची तो मांझी को पैन, जानें पूरा ब्यौरा

बिहार विधानसभा चुनावों की तैयारियां जारी है। कहीं एक दूसरे पर जम कर आरोपो के तीर चलाये जा रहे तो कहीं चुनावी बिसात पर ऐसी गोटियां बिछाई जा रही है जिससे जीत में कोई कोर कसर बाकी न रहे। गठबंधन में सीटों के बंटवारे अपर तो नेताओं में टिकट को लेकर उलझन की स्थिति है। इसी बीच चुनाव आयोग ने कुछ दलों को नया चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिया है।

रघुवंश प्रसाद सिंह का निधन, हाल ही में दिया था राजद से इस्तीफा

पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह का आज नई दिल्ली के अखिल भारतीय अयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में निधन हो गया। वह पिछले कुछ दिनों से लगातार बीमार चल रहे थे। उनका इलाज पहले पटना एम्स में हुआ और बाद में उन्हें दिल्ली एम्स में दाखिल कराया गया था। उन्हें सांस लेने संबंधी तकलीफ थी। पिछले कुछ दिनों से वह वेंटीलेटर सपोर्ट पर थे।

बिहार चुनाव- सीट बंटवारे की उहापोह से परेशान दल, संभावित उम्मीदवारों में भी संशय की स्थिति

कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के बीच यह स्पष्ट हो गया है कि बिहार विधानसभा चुनाव अपने तय समय पर होंगे। इन चुनावों को लेकर दल और उनके नेता अपनी कमर कसने में कोई कोर कसर नबी छोड़ना चाहते हैं। बागियों को सहारा देने से न तो परहेज़ है न रूठे यारों को मनाने से लेकिन उस बीच एक संकट ऐसा है जो हर दल और गठबंधन के नेताओं में आम है।

दिल्ली एम्स से रघुवंश प्रसाद सिंह ने रांची रिम्स में भेजा लालू को अपना इस्तीफा, तबियत भी बिगड़ी

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) को बिहार विधानसभा चुनावों से पहले बड़ा झटका लगा है। पार्टी के सबसे बड़े स्वर्ण चेहरे और तीन दशक से भी ज्यादा लंबे वक्त तक लालू के सबसे विश्वासी सहयोगी रहे रघुवंश प्रसाद सिंह ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। इससे पहले भी उनके इस्तीफा देने की खबर थी लेकिन तब राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू यादव ने इसे स्वीकार नही किया था।

बिहार विधानसभा चुनाव- नितीश सरकार और राजद में ज़ुबानी जंग तेज़, एक दूसरे को बता रहे है बीते युग की पार्टी

बिहार विधानसभा चुनाव- नितीश सरकार और राजद में ज़ुबानी जंग तेज़, एक दूसरे
को बता रहे है बीते युग की पार्टी

इस दिन हो सकता है बिहार विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान, कोरोना काल मे चुनाव कराने वाला पहला राज्य होगा

बिहार विधानसभा चुनावों को लेकर सत्तापक्ष की जिद्द और विपक्ष की चुनाव न कराने की मांग के बीच अगले एक दो दिनों में चुनावों की तारीखों का ऐलान किया जा सकता है। कोरोना संकट के बीच बिहार ऐसा पहला राज्य होगा जहां चुनाव होंगे। माना जा रहा है कि निर्वाचन आयोग 13 सितम्बर को तारीखों का ऐलान कर सकता है। यह अनुमान इसलिए लगाए जा रहे क्योंकि वर्तमान विधानसभा के चुनावी तारीखों का ऐलान भी 9 सितम्बर को हुआ था।

डर- महुआ छोड़ इस सीट पर तैयारी में लगे लालू के लाल तेजप्रताप, सोशल डिस्टेंसिंग और कोरोना प्रोटोकॉल की उड़ी धज्जियां

राजनीति में हर दल और नेता यही चाहता है कि किसी भी कीमत पर उसे ऐसी सीट मिले जहाँ से वह चुनाव जीत सके और जनता उसे स्वीकार कर सके। खास कर जब छवि को पहले से ठीक साबित करने की चुनौती और बड़बोलेपन से निपटने की चुनौती सामने हो तो यह और अहम हो जाता है।

चुनावी चूर्ण बाँटते नीतीश की तस्वीर शेयर कर बोले लालू, वर्चुअल-फर्चुअल नही एक्चुअल में बताओ..

लालू के ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते हुए लिखा गया कि 15 वर्षों में क्या-क्या काम किया दिखाओ, वर्चुअल-फ़र्चुअल नहीं ऐक्चूअल में बताओ? इसके साथ ही हैशटैग #Bihar rejectsnitish का भी प्रयोग किया गया।इसी ट्वीट के साथ नीतीश कुमार की एक तस्वीर कार्टून के रूप में साझा की गई। इस तस्वीर में लिखा गया नीतीश का प्रसिद्ध चुनावी चूर्ण।

विशेष- लोजपा-जदयू खींचतान में बीजेपी की खामोशी बहुत कुछ कहती है, पढ़ें

बिहार विधानसभा चुनावों की बिसात बिछने लगी है। नफा-नुकसान का आकलन शुरु हो गया है। इसी के साथ पहले शुरु हुआ नेताओं के पाला बदलने का खेल, फिर हुआ दल बदलने का खेल और अब शुरू है आरोप-प्रत्यारोप का दौर। आरोप प्रत्यारोप भी अगर सत्ता पक्ष और महागठबंधन के बीच हो तो शायद इसमें कुछ नया नही माना जाता लेकिन राजनीति में कुछ भी संभव है कि तर्ज पर पहले जहां मांझी, नीतीश के साथ आ मिले वहीं एनडीए के पुराने पार्टनर लोजपा ने मोर्चा खोल दिया।

पहली डिजिटल रैली में गरजे नीतीश, कहा-बिहार को लालटेन की जरूरत नही, पढ़ें

बिहार चुनावों को लेकर वक़्त जैसे जैसे नजदीक आ रहा है वैसे वैसे दलों और नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज होती जा रही है। एक तरफ जहां एनडीए की तरफ से नीतीश कुमार मोर्चा संभाले नजर आ रहे हैं वहीं दूसरी तरफ महागठबंधन की तरफ से तेजस्वी आरोपों के तीर जदयू की तरफ हर दिन चला रहे हैं। आज पहले जहां तेजस्वी ने नीतिश पर हमला बोलते हुए दस सवाल पूछे थे वहीं अपनी पहली डिजिटल रैली के माध्यम से नीतीश ने अब पलटवार किया है।

बिहार- तेजस्वी ने ट्वीट कर पूछे तीखे सवाल, कहा- वर्चुअल के बहाने एक्चुअल मुद्दों से भागने नही देंगे

बिहार चुनावों को लेकर अब आरोप-प्रत्यारोप का तीखा दौर शुरू हो गया। वर्चुअल रैली और सम्मेलन के भरोसे कोरोना के इस दौर में चुनावी बाजी जीतने की जंग है। वर्चुअल तरीके से अभी तक बीजेपी सभी दलों से आगे है वहीं जदयू भी बीजेपी के ठीक पीछे है। अब जब सत्ता पक्ष एक्टिव है तो विपक्ष की मजबूरी ही सही लेकिन करना तो पड़ेगा ही। ऐसे में कांग्रेस भी गुरुवार से जहां डिजिटल प्रचार अभियान की शुरुआत करेगी वहीं राजद पहले से महागठबंधन की तरफ से मोर्चा संभाल रही है।

बिहार में राजद-जदयू का खेल खराब कर सकते हैं यह दल, पढ़ें

बिहार विधानसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच दल और इसके नेता अब एक्टिव नजर आने लगे हैं। यूँ तो यह माना जा रहा है कि सत्ता की मुख्य लड़ाई राजद की अगुवाई वाली महागठबंधन और नीतीश कुमार की अगुवाई वाली महागठबंधन के बीच ही होगी। हालांकि इससे इनकार नही किया जा सकता कि कई छोटे दलों की मौजूदगी इस खेल को खराब करने का माद्दा रखती है।

तेजप्रताप को होटल में ठहराना मालिक को पड़ा भारी, केस दर्ज

राजद नेता तेजप्रताप यादव अपने पिता और राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव से मिलने रांची पहुंचे थे। इसी क्रम में वह होटल कैपिटल रेजीडेंसी में ठहरे थे। अब उनका इस होटल में रुकना विवादों में घिर गया है और होटल मालिक पर प्राथमिकी दर्ज की गई है।

आखिर क्यों लालू ने तेजप्रताप को किया रांची तलब?

लालू प्रसाद यादव ने अपने बड़े बेटे तेजप्रताप यादव को रांची बुलाया है। माना जा रहा है कि लालू उनके रघुवंश प्रसाद सिंह पर दिए बयान को लेकर खफा हैं। इसके अलावा एक चर्चा यह भी है कि तेजप्रताप के ससुर और लालू के समधी चंद्रिका राय की जदयू में एंट्री और उनकी बेटी ऐश्वर्या के तेजप्रताप के खिलाफ चुनाव लड़ने की खबरों ने भी राजद और लालू परिवार के लिए मुसीबत बढ़ा दी है। खबरों में यह भी कहा गया है कि तेजप्रताप इस बार महुआ विधानसभा की जगह हसनपुर से चुनाव लड़ सकते हैं और इसी बात पर मुहर लगवाने वह पिता लालू प्रसाद यादव से मिलने पहुंचेंगे। कल उनकी मुलाकात लालू प्रसाद यादव से हो सकती है

ससुर के बाद रघुवंश प्रसाद सिंह की ‘हैसियत’ बताते नजर आए तेज प्रताप, पढ़ें

लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव अपने बयानों की वजह से अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। अभी कुछ दिनों पहले जब उनसे उनके ससुर चंद्रिका राय के जदयू में शामिल होने को लेकर मीडिया ने सवाल किया तो इन्होंने इसके जवाब में बेबाक बोलते हुए कहा कि उनकी कोई हैसियत नही है। जदयू को इसका कोई फायदा नही होगा।