पहली डिजिटल रैली में गरजे नीतीश, कहा-बिहार को लालटेन की जरूरत नही, पढ़ें

बिहार चुनावों को लेकर वक़्त जैसे जैसे नजदीक आ रहा है वैसे वैसे दलों और नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज होती जा रही है। एक तरफ जहां एनडीए की तरफ से नीतीश कुमार मोर्चा संभाले नजर आ रहे हैं वहीं दूसरी तरफ महागठबंधन की तरफ से तेजस्वी आरोपों के तीर जदयू की तरफ हर दिन चला रहे हैं। आज पहले जहां तेजस्वी ने नीतिश पर हमला बोलते हुए दस सवाल पूछे थे वहीं अपनी पहली डिजिटल रैली के माध्यम से नीतीश ने अब पलटवार किया है।

बिहार- तेजस्वी ने ट्वीट कर पूछे तीखे सवाल, कहा- वर्चुअल के बहाने एक्चुअल मुद्दों से भागने नही देंगे

बिहार चुनावों को लेकर अब आरोप-प्रत्यारोप का तीखा दौर शुरू हो गया। वर्चुअल रैली और सम्मेलन के भरोसे कोरोना के इस दौर में चुनावी बाजी जीतने की जंग है। वर्चुअल तरीके से अभी तक बीजेपी सभी दलों से आगे है वहीं जदयू भी बीजेपी के ठीक पीछे है। अब जब सत्ता पक्ष एक्टिव है तो विपक्ष की मजबूरी ही सही लेकिन करना तो पड़ेगा ही। ऐसे में कांग्रेस भी गुरुवार से जहां डिजिटल प्रचार अभियान की शुरुआत करेगी वहीं राजद पहले से महागठबंधन की तरफ से मोर्चा संभाल रही है।

राजनीति जो न कराए, बिहार सरकार की घोषणा, दलित की हत्या पर आश्रित को मिलेगी नौकरी, पढ़ें

बिहार विधानसभा चुनावों को लेकर अब दल और नेता सक्रिय नजर आने लगे हैं। समीकरण साधने के लिए क्या दुश्मन क्या दोस्त सब जायज है। कहीं रूठे यारों को मनाने का क्रम जारी है तो कहीं पाला बदल सुरक्षित हो जाने की जद्दोजहद है वहीं हमेशा की तरह सत्ता पक्ष के तरकश में शिलान्यास, उद्घाटन के साथ हर वर्ग को लुभाने के लिए कुछ न कुछ वादे हैं।

नीतीश के खेवनहार बनें मांझी, लोजपा के तंज पर दी कड़ी प्रतिक्रिया

बिहार विधानसभा चुनावों को लेकर गहमागहमी बढ़ गई है। इसी के साथ बढ़ी है बयानबाजी भी और पाला बदलने का दौर भी शुरू हो चुका है। कल तक महागठबंधन के साथ रहे हिंदुस्तान आवाम मोर्चा सुप्रीमो जीतनराम मांझी अब खुलकर एनडीए के साथ हैं और नीतीश के सपोर्ट में जोरदार बैटिंग करते नजर आ रहे हैं। वहीं लोजपा और चिराग के बयान से यह भी बहुत साफ हो रहा कि शायद एनडीए में सब ठीक नही है।

बिहार में राजद-जदयू का खेल खराब कर सकते हैं यह दल, पढ़ें

बिहार विधानसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच दल और इसके नेता अब एक्टिव नजर आने लगे हैं। यूँ तो यह माना जा रहा है कि सत्ता की मुख्य लड़ाई राजद की अगुवाई वाली महागठबंधन और नीतीश कुमार की अगुवाई वाली महागठबंधन के बीच ही होगी। हालांकि इससे इनकार नही किया जा सकता कि कई छोटे दलों की मौजूदगी इस खेल को खराब करने का माद्दा रखती है।

बिहार- एनडीए की नाव पर सवार होते ही लालू पर मांझी का तंज, कहा- मेरा बेटा एमए पास

बिहार विधानसभा चुनावों के मद्देनजर पाला बदलने का खेल जारी है। क्या दल और क्या नेता सब अपने लिए सुरक्षित पनाह ढूंढने में लगे हैं। इसी क्रम में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की अगुवाई वाली हिंदुस्तान अवाम मोर्चा एनडीए के हिस्सा बन चुकी है। महागठबंधन छोड़ने के बाद एनडीए में शामिल होने का एलान करने वाले जीतन राम मांझी ने इस अवसर पर लालू और उनके पुत्र तेजस्वी यादव पर जोरदार हमला बोला है।

लालू की अनुपस्थिति में राजद का कैसे लगे बेड़ा पार, रूठने लगे पुराने यार

बिहार में चुनावी सुगबुगाहट के बीच राजनीतिक उथल-पुथल तेज हो गई है। पाला बदलने के साथ तीखी बयानबाज़ी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी पूरे उफान पर है। जहां नेता अपनी सीट और राजनीतिक भविष्य की चिंता करते हुए पाला बदलने में लगे हैं वहीं दल भी इस भागमभाग से अनजान नही हैं और डैमेज कंट्रोल के लिए प्लान बी की रणनीति के साथ भी तैयार हैं। पाला बदलने का खेल जदयू नेता और नीतीश सरकार में मंत्री रहे श्याम रजक से शुरू हुआ, वह जदयू छोड़ राजद में शामिल हुए। इसके बाद लालू के समधी चंद्रिका राय राजद छोड़ जदयू में शामिल हो गए।

कोरोना के चलते फीका रहेगा बिहार का ‘चुनावी दंगल’, चुनाव आयोग ने जारी की गाइडलाइन्स

गाइडलाइन्स के मुताबिक उमीदवार को सिक्योरिटी मनी और नामांकन पत्र ऑनलाइन ही भरना होगा. मतलब की इस बार नामांकन भरने के लिए उम्मीदवार रथ यात्राएं नहीं कर सकेंगे.

सुशांत के पिता ने खुद को घोषित किया सुशांत का कानूनी वारिस, किसी और ने अब कुछ बोला तो…

सुशांत सिंह राजपूत के पिता के के सिंह ने खुद को अपने बेटे सुशांत सिंह राजपूत का कानूनी वारिस घोषित किया है। उन्होंने यह फैसला ऐसे वक्त में लिया है जब मीडिया में कुछ लोगों ने बयान जारी कर कहा था कि सुशांत ने उन्हें हायर किया था एयर उनकी सेवाएं ले रहा थे। इस बारे में बोलते हुए सुशांत के पिता ने कहा कि वकीलों ने सुशांत और उनके बीच हुई बातचीत के बारे में बताया जो कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया और इंडियन एविडेंस एक्ट के खिलाफ है।

विशेष- बिहार में दल-बदल की राजनीति शुरू, कल तक साथ थे आज बने विरोधी, अभी कई नाम और दल बदलेंगे पाला!

2015 बिहार विधानसभा चुनाव की बात करें तो नीतीश बीजेपी का साथ छोड़ अपने धुर विरोधी लालू के साथ महागठबंधन कर बैठे और अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए संघर्ष कर रहे राजद को जैसे संजीवनी दे दी।

नीतीश के मंत्री को तेजस्वी का सहारा, जदयू से निकाले गए तो आरजेडी में हुए शामिल

जदयू के बड़े दलित नेता श्याम रजक पार्टी से निष्काषित किए जाने के बाद अब आरजेडी में शामिल हो गए हैं।

बिहार में टूट की तरफ बढ़ रहा एनडीए, तेजस्वी बोले- मेरा बोलना अभी ठीक नही

चिराग आसवन से पूछा गया कि आज इस अचानक बुलाई गई मीटिंग का एजेंडा क्या है तो उन्होंने कहा बिहार में बाढ़ और कोरोना महामारी जैसे बहुत मुद्दे हैं

जदयू के बड़े नेता की कोरोना से मौत, राबड़ी देवी को एमएलसी बनाने के लिए खुद दे दिया था इस्तीफा

एक समय वह आरजेडी सुप्रीमों लालू प्रसाद यादव के करीबियों में गिने जाते थे। लालू ने उन्हें 1996 में एमएलसी बनाया था हालांकि 1997 में उन्होंने इस्तीफा दे दिया था।

क्या एनडीए में नही है एकमत? यह बड़ा नेता है नीतीश के खिलाफ

पहले सीएम के चुनाव कराने के फैसले और अब खुद सीएम की खिलाफत कर रामविलास ने मोर्चा खोल यह स्पष्ट कर दिया है कि एनडीए में सब वेल एंड गुड नही है।

बिहार में कोरोना के बाद बाढ़ से हाहाकार, लाखों प्रभावित, सीएम ने लिया जायज़ा

बाढ़ से बिहार के 38 में से 16 जिले बुरी तरह प्रभावित हैं। लाखों की आबादी अपना सब कुछ गंवा कर जान बचाने की जद्दोजहद कर रही है।

बिहार पुलिस परीक्षा नतीजे में बड़े गोलमाल की आशंका,पढ़ें

मोबाइल सहित किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का प्रयोग वर्जित है ऐसे में यह तस्वीर कहाँ से आई? अगर यह सच है तो परिणाम में किसी बड़े गोलमाल की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है.

एकजुट विपक्ष के लिए ममता-सोनिया का मोदी के खिलाफ यह आखिरी दांव,पढ़ें

यह दांव है बिना पीएम उम्मीदवार या चेहरे के चुनाव लड़ना। उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो हाल ही में दिल्ली पहुंची ममता बनर्जी और सोनिया गांधी की मुलाकात के बाद यह सामने आया है कि विपक्ष चुनाव बिना किसी चेहरे पर लड़ेगा।

इस नेता की छवि ही बनी ऐसी, बदनाम हुए तो क्या हुआ नाम तो हुआ

आज उम्र के इस पड़ाव में जेल में जीवन बिताने को बाध्य कर दिया। इसके बावजूद न लालू झुके, न बदला उनका तेवर और अंदाज़। इसलिए तो कहते हैं कि लालू बदनाम तो हुए लेकिन नाम भी खूब हुआ।

शराबबंदी के दो साल लेकिन इन दो सवालों का नही है कोई जवाब

यह फैसला उचित और समाज हित मे है लेकिन इस फैसले के बाद जो शराबी जेल में बंद है( संख्या एक लाख से ज्यादा है) उनके परिवार की खुशी का क्या?