सरकार के खिलाफ लामबंद भी दिख रहे हैं यही वजह है कि साल 2017 में महाराष्ट्र के किसानों की एक बड़ी क्रांति देखने को मिली और विरोध प्रदर्शन का एक लंबा दौर चला।
हम जिस अभिनेत्री की बात कर रहे हैं वह नाम है इलियाना डीक्रूज का, हाल ही में उन्होंने वर्ल्ड कांग्रेस ऑफ मेन्टल हेल्थ में अपनी इस मनः स्थित्ति का खुलासा करते हुए कहा था कि वह अपने शरीर के बनावट को लेकर डिप्रेशन में चली गईं थी।
विद्यार्थी उम्मीदों का बोझ, पढ़ाई का बोझ उठाने में खुद को असमर्थ समझने लगते हैं और सफलता पाने की होड़ में पीछे छूट जाने के भय से, परिवार के डर से आत्महत्या जैसे गंभीर कदम उठाने को मजबूर हो जाते हैं।
यह घटना मुम्बई की है। यहां बेंगलुरु के रहने वाले एक 29 वर्षीय संगीतकार जिसका नाम करण जोसेफ था ने अचानक दोस्तों के साथ टीवी देखते हुए 12 वीं मंजिल से कूदकर जान दे दी थी।
आत्महत्या मन के भावों की वह प्रवृति है जब इंसान जीने की उम्मीदें छोड़ देता है। जब वह मान लेता है कि जिंदगी में कुछ हासिल नही हो सकता या मन टूट जाता है।
दिल्ली में तमिलनाडु से आकर किसान 41 दिन तक धरने पर बैठें और कोई न सुने तो यह दुर्भाग्य ही है। उनकी मांग भी कोई बहुत बड़ी नही थी, बस ऋण माफी और पटवन के लिए उचित पानी की मांग कर रहे थे।
वास्तविकता की बात करें तो आत्महत्या में भारत सबसे आगे है और यहां हर घंटे, हर मिनट का आंकड़ा विनाशकारी है। ऐसे में अगर आर्थिक लाभ देने की कोई नीति बन जाये तो भी अनुमानतः अलग से इसके लिए एक फंड बनाना पड़ेगा।
हाल के समय मे खास कर पिछले एक साल में कई ऐसे मामले आये जब प्यार से लेकर नौकरी, और घर से लेकर बाहर तक कि समस्याओं से घिरे लोगों के जान देने की घटनाएं सामने आई।
ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ क्विन्सलैंड में हुए एक शोध के मुताबिक 12 साल से कम उम्र के बच्चों में आत्मघाती कदम उठाने का विचार अन्य बच्चों की तुलना में पांच गुना ज्यादा होता है।
वैदिक ग्रंथों में एक लाइन में इनका जवाब मिलता है। आत्मघाती मनुष्यों के बारे में कहा गया है कि-असूर्या नाम ते लोका अँधेन तमसावृता।तास्ते प्रेत्यभिगच्छन्ति ये के चात्महनो जनाः
इस कैदी का नाम सोमनाथ दगड़ू सेन्डे बताया जा रहा है। उसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। माना जा रहा है कि लोकलज्जा और अपने किये पर पछतावे की वजह से उसने ऐसा कदम उठाया।
इस रिपोर्ट के अनुसार कैरेबियाई देश गुयाना में महिला आत्महत्या के मामले सबसे ज्यादा दर्ज किए गए। आंकड़ों के मुताबिक यहां प्रति एक लाख लोगों पर 44 लोग आत्महत्या कर रहे हैं।
शहर आने वाला या अपना राज्य और समाज छोड़ रोजगार ढूंढने वाला हर व्यक्ति महानगर में आकर अपने अरमान पूरे कर ले या उसे तुरंत नौकरी मिल जाये यह कहीं से जरूरी नही
आपको जान कर हैरानी होगी, हमें लिखते हुए हो रही है कि अलग-अलग गाँव ऐसे हैं जहां लोग आज भी अपने जनप्रतिनिधि को नही जानते, अपने सीएम को नही पहचानते, योजनाओं की जानकारी नही है, कानून का आता पता नही है।