आत्महत्या में सबसे आगे जवान और किसान, कौन जिम्मेदार

जय जवान जय किसान का नारा दिया गया था तब शायद यह क़तई नही सोचा गया होगा कि देश के यह दो वर्ग आने वाले समय मे आत्महत्या के आंकड़ों में सबसे आगे होंगे।

भारत बंद की क्या रही उपलब्धि, नेताओं पर हुए हमले या राजनीतिक दलों की बढ़ती बेचैनी?

हिंसा गलत है लेकिन जिस तरह बिहार में पप्पू यादव और श्याम रजक आज भीड़ के हमले का शिकार हुए। यह सही नही लेकिन यह सोचना होगा कि यह स्थिति क्यों बनी? कौन है जिम्मेदार? इससे पहले एमपी और राजस्थान में भी कई जगह से बड़े नेताओं पर हमले की खबर आ चुकी है। राजनीति बदलेगी, बदलनी पड़ेगी। यही वक़्त की नजाकत है। खैर नजारे हम क्या देखें और दिखाएं यह तो 2019 में ही पता लगेगा।

न खाद, न पानी कैसे चले जिंदगानी

कृषि के लिए पानी की समुचित व्यवस्था आज भी नही है। सरकार ट्यूबवेल लगवाने या पम्प सेट खरीदने के नाम पर सब्सिडी देने की बात करती है, देती भी है लेकिन किसे यह नही पता क्योंकि जिन्हें यह मिलता है वह इसके वाजिब हकदार होते ही नही!

किसानों की लाश पर राजनीति कब तक

कर्ज़ माफी, सब्सिडी, खाद पानी हर तरह से यहां तक कि फसल नुकसान से लेकर हर वह कड़ी इस वादे का हिस्सा होती है जिससे किसान मोहित हो सके लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात पर आकर खत्म हो जाता है।