क्या मोदी के खिलाफ राहुल से बढ़िया विकल्प बन सकती थी प्रियंका ?

पर्दे के पीछे सोनिया के अध्यक्ष रहते या अब राहुल के अध्यक्ष बनने के बाद कई अहम मौकों पर प्रियंका ने कमान संभाली है।

बीजेपी ने लोकसभा के लिए खेला सबसे बड़ा दांव, कांग्रेस में हड़कंप

2019 लोकसभा की बात करें तो कांग्रेस अलग थलग है लेकिन दम्भ भर रही है, वहीं क्षेत्रीय दल भी सत्ता के शीर्ष पर पहुंचने का ख्वाब बुन रहे हैं।

अजब राजनीति की गजब कहानी, कांग्रेस की यह अकड़ है पुरानी

परिवारवाद का आरोप लगता आया है। घोटाले के आरोप लगे। आपातकाल कांग्रेस के ही शासनकाल में लगा, सिख विरोधी दंगे हुए। इंदिरा और राजीव ने अपनी जान गंवाई। इसके बावजूद आज अगर यह पार्टी खड़ी है और सिमटती नजर आने के बावजूद बीजेपी को टक्कर देने का दम्भ भरती नजर आ रही है तो यकीन मानिए कुछ तो खास इसमे जरूर है।

इन वजहों से डूबी बीजेपी की नाव, पढ़ें

सत्ता के खिलाफ एन्टी इंकमबेंसी, मोदी की आरक्षण के खिलाफ नीति, स्वर्ण विरोधी नीति कहना ज्यादा जायज है। इसके अलावा किसानों की दुर्दशा, बेरोजगारों की आशा और युवाओं का पलायन।

फिर फ्लॉप होगा विपक्षी गठबंधन, पढ़ें दो सबसे बड़े कारण

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को नेता मानने को तैयार नही, इसके अलावा अखिलेश,ममता, मायावती, मुलायम जैसे नेता भी नेतृत्व के दावेदार हैं ऐसे में एक नाम पर सहमति बनाना बड़ी चुनौती है।

कांग्रेस के सहयोगी रहे इस बड़े नेता ने कहा-मोदी की नीयत पर शक नही

एक मराठी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि निजी तौर पर मुझे या किसी को भी कम से कम पीएम मोदी की नीयत पर शक नही होना चाहिए।

वीपी सिंह और राजीव गांधी की गलती दोहरा रहे हैं पीएम मोदी, क्या होगा इसका अंजाम ?

सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी/एसटी एक्ट में हुए बदलाव पर अध्यादेश लाकर उसे रद्द करना। यह अध्यादेश अब मोदी सरकार के लिए जी का जंजाल बनता नजर आ रहा है। यही वजह है कि अब सोशल मीडिया सहित राजनीतिक जानकारों के बीच इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि क्या मोदी ने भी जल्दबाजी में कुछ ऐसा फैसला ले लिया और गलती कर दी जो वीपी सिंह और राजीव गांधी जैसे प्रधानमंत्री कर चुके थे?

विदेश जाकर ही राहुल को क्यों याद आते हैं मुद्दे, जानें

वह कांग्रेस की तरफ से पीएम पद के उम्मीदवार भी माने जाते हैं। ऐसे में कहीं न कहीं वह भी अपनी एक अंतरराष्ट्रीय छवि विकसित करना चाहते हैं। यह तो हुई पहली वजह। दूसरी वजह यह है कि वह पीएम की तरह ही देश के मुद्दों को दुनिया के मंचों से उठा कर उनके ही तरीके से उनका विरोध करना चाहते हैं।

एकजुट विपक्ष के लिए ममता-सोनिया का मोदी के खिलाफ यह आखिरी दांव,पढ़ें

यह दांव है बिना पीएम उम्मीदवार या चेहरे के चुनाव लड़ना। उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो हाल ही में दिल्ली पहुंची ममता बनर्जी और सोनिया गांधी की मुलाकात के बाद यह सामने आया है कि विपक्ष चुनाव बिना किसी चेहरे पर लड़ेगा।

बीजेपी सांसद का बयान, कहा राहुल से गले मिलने पर हो सकता है तलाक, पढ़ें कुछ खास

केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भले ही आया और चला गया लेकिन इस दौरान संसद में घटी घटनाएं अब तक चर्चा के केंद्र में हैं। यही वजह है कि आये दिन कोई न कोई बयान और नई राजनीति देखने और सुनने को मिल रही है। इस चर्चा के केंद्र में दो व्यक्ति और दो बातें हैं। दोनों व्यक्ति में पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी हैं तो दूसरे खुद पीएम नरेंद्र मोदी।

राहुल की राह में कई बाधाएं हैं, पढ़ें कुछ खास

राहुल के सामने सबसे बड़ी बाधा पार्टी पर लगे भ्र्ष्टाचार के कलंक को मिटाना न सही लेकिन यह भरोसा दिलाना है कि यह कांग्रेस नई है, इसकी सोच नई है।

राजनेताओं से यह सवाल पूछने की जहमत कौन उठाये, पूछ भी लें तो कौन सा भला हो जाये?

दिलचस्प यह भी है कि आज इसपर सवाल भी नही उठाये जा रहे हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि न इससे टीआरपी मिलेगी, न इसमे कोई मसाला है, न किसी की दिलचस्पी है।

राहुल-मोदी दोनों में एक समानता, आज की पीढ़ी को सीख लेने की जरूरत

दोनो नेताओं का अपनी-अपनी माँ के प्रति सम्मान और प्यार। राहुल जहां सोनिया के लाडले हैं वहीं मोदी भी कोई ऐसा मौका नही छोड़ते जहां माँ से मिलने की बात आती है।

राहुल के सामने बतौर अध्यक्ष हैं यह बड़ी चुनौतियां, इनसे पार पा गए तो मोदी पर पड़ेंगे भारी

राहुल के सामने सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस की छवि के साथ अपनी छवि को सुधारना है। कार्यशैली में बदलाव लाना है क्योंकि कांग्रेस आज भी नेहरू इंदिरा वाली कांग्रेस है इसमें कुछ भी नयापन नजर नही आता।

पापा के हत्यारों को राहुल प्रियंका ने क्यों किया माफ, पढ़ें वजह

उन्होंने इसके पीछे के कारण बताते हुए कहा कि मैंने और प्रियंका ने हिंसा देखी और झेली है। ऐसे में हम हिंसा कतई पसंद नही करते। हम किसी से नफरत नही करते हैं।

राहुल गांधी का राजनीतिक सफर, ऐसा नही इसमे सिर्फ नाकामियां हैं

आज भले ही वह एक चुनौती से भरी हुई राह पर कांग्रेस को लेकर चल रहे हैं लेकिन ऐसा नही है कि नाकामी ही उनकी पहचान है जिस मेहनत से राहुल राजनीति में डंटे हैं उससे साफ है कांग्रेस और राहुल के खाते में भी आने वाले समय मे कई बड़ी उपलब्धियां दर्ज होंगी।