एकजुट विपक्ष के लिए ममता-सोनिया का मोदी के खिलाफ यह आखिरी दांव,पढ़ें

यह दांव है बिना पीएम उम्मीदवार या चेहरे के चुनाव लड़ना। उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो हाल ही में दिल्ली पहुंची ममता बनर्जी और सोनिया गांधी की मुलाकात के बाद यह सामने आया है कि विपक्ष चुनाव बिना किसी चेहरे पर लड़ेगा।

अर्जित को गिरफ्तार न करने के पीछे यह वजह है, पढ़ें विस्तार से

चंद लोगों की गलती या कहें हुड़दंग का खामियाजा आज पूरा बिहार भुगतने को मजबूर है। भागलपुर में एक जुलूश के बाद हुए हंगामे के बाद अब यह मुंगेर, नालंदा, समस्तीपुर तक पहुंच चुका है। इसमे अब राजनीति भी खूब हो रही है या यूं कहें राजनीति की वजह से ही यह सब हो रहा है।

इस नेता की छवि ही बनी ऐसी, बदनाम हुए तो क्या हुआ नाम तो हुआ

आज उम्र के इस पड़ाव में जेल में जीवन बिताने को बाध्य कर दिया। इसके बावजूद न लालू झुके, न बदला उनका तेवर और अंदाज़। इसलिए तो कहते हैं कि लालू बदनाम तो हुए लेकिन नाम भी खूब हुआ।

शराबबंदी के दो साल लेकिन इन दो सवालों का नही है कोई जवाब

यह फैसला उचित और समाज हित मे है लेकिन इस फैसले के बाद जो शराबी जेल में बंद है( संख्या एक लाख से ज्यादा है) उनके परिवार की खुशी का क्या?

विशेष- नीतीश की चुप्पी आत्मविश्वास या मजबूरी, क्या फिर बनेगी बीजेपी से दूरी?

नीतीश को अपने शासन और प्रशासन पर पूरा भरोसा है, ऐसा लगता है। यही वजह है कि वह इतने तनाव के बीच भी सिर्फ नजरें गड़ाए, दबाव झेलते हुए हुए चुपचाप स्थित्ति के आकलन और राजनीतिक नफा नुकसान में लगे हैं।

पुलिस का इससे विभत्स चेहरा शायद ही नजर आए, यह अपने विभाग के नही तो आपके क्या होंगे?

सिपाही को उसी के साथियों ने एक डीएसपी रैंक के अधिकारी के कहने पर इतना पीटा की वह मर गया। और तो और इस मामले को दबाने की भरपूर कोशिश हुई लेकिन अब मामले ने न सिर्फ तूल पकड़ लिया है बल्कि गृह मंत्री राजनाथ सिंह तक से इंसाफ की गुहार लगाई जा रही है।

राहुल के सामने बतौर अध्यक्ष हैं यह बड़ी चुनौतियां, इनसे पार पा गए तो मोदी पर पड़ेंगे भारी

राहुल के सामने सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस की छवि के साथ अपनी छवि को सुधारना है। कार्यशैली में बदलाव लाना है क्योंकि कांग्रेस आज भी नेहरू इंदिरा वाली कांग्रेस है इसमें कुछ भी नयापन नजर नही आता।

विरोधियों को छोड़िये अब सहयोगी भी नही दे रहे बीजेपी-कांग्रेस को भाव

कांग्रेस को कोई भी क्षेत्रीय दल तवज्जो देता नही दिख रहा और बीजेपी किसी अन्य दल को अपने सामने तवज्जो दे उनका ग्राफ बढ़ाना नही चाहती है। यही वजह है कि हर जायज-नाजायज मांग मानने के बदले बीजेपी ने डिफेंड करना ही सही समझा है।

क्या हुआ तेरा वादा, यह मोदी से क्यों नही पूछता विपक्ष?

भारत के लोकतंत्र में जिस तरह 2014 में मोदी सरकार पूर्ण बहुमत से सत्ता में आई और विपक्ष सिमटता चला गया वैसे में न सिर्फ सरकार निरंकुश हुई बल्कि विपक्ष भी कमजोर ही हुआ।

30 साल में 7 वीं बार हो रही विपक्षी एकता की बात, इस बार आवाज़ दक्षिण से आई है

इस बार यह मुद्दा उठाया है दक्षिण के तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर ने और तो और कुछ दलों ने उनके बयान के बाद आश्वासन और स्वीकृति तक दे दी है।

क्या तय समय से पहले हो सकते हैं लोकसभा चुनाव, जानें क्या है सच

खबरों के मुताबिक अप्रैल में एलान हो सकते हैं। जी नही ऐसा अब इस माहौल में नही होगा जब कि बीजेपी अपने सहयोगियों और विपक्ष से घिरी हुई है। पहले ऐसा एलान इसलिए संभव था क्योंकि मोदी लहर फीकी पड़ने से पहले मोदी और बीजेपी यह मौका भुना लेना चाहते थे।

बिहार में बहार है,भ्रष्टाचार अपरम्पार है

खबर के मुताबिक बिहार के भागलपुर में एक बाँध उद्घाटन से पहले ही टूट गया है और आश्चर्य कि बात यह है कि दिनांक 20 सितम्बर को खुद बिहार में बहार के मुखिया नितीश कुमार जी इसका उद्घाटन करने वाले थे.

बिहार में राजनीतिक बदलाव की बयार,महागठबन्धन में बढ़ रही है दरार

राष्ट्रपति चुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को नीतीश कुमार द्वारा समर्थन देने बाद से महागठबंधन में तल्खी का दौर जारी है।