कांग्रेस ने सपा-बसपा पर दबाव बनाने के मकसद से दोनों सीटों पर सपा प्रमुख अखिलेश के मना करने के बावजूद प्रत्याशी खड़े किए। इसके पीछे मकसद यह था कि या तो सपा झुके और एक एक सीट पर बात बने
राहुल के सामने सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस की छवि के साथ अपनी छवि को सुधारना है। कार्यशैली में बदलाव लाना है क्योंकि कांग्रेस आज भी नेहरू इंदिरा वाली कांग्रेस है इसमें कुछ भी नयापन नजर नही आता।
उन्होंने इसके पीछे के कारण बताते हुए कहा कि मैंने और प्रियंका ने हिंसा देखी और झेली है। ऐसे में हम हिंसा कतई पसंद नही करते। हम किसी से नफरत नही करते हैं।
आज भले ही वह एक चुनौती से भरी हुई राह पर कांग्रेस को लेकर चल रहे हैं लेकिन ऐसा नही है कि नाकामी ही उनकी पहचान है जिस मेहनत से राहुल राजनीति में डंटे हैं उससे साफ है कांग्रेस और राहुल के खाते में भी आने वाले समय मे कई बड़ी उपलब्धियां दर्ज होंगी।
प्रशांत किशोर ही वह व्यक्ति थे जिन्होंने बीजेपी के प्रचार की कमान संभाल रखी थी और ब्रांड मोदी की सुनामी पूरे देश मे खड़ी कर दी थी। अब प्रशांत किशोर एक बार फिर चर्चा में हैं। चर्चा में होने की वजह कुछ दिनों पहले पीएम से हुई उनकी मुलाकात है।
स्मृति ने ट्वीट कर राहुल पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर आप दुनिया के सबसे लंबे ताजपोशी उत्सव से फ्री हो गए हैं तो मैं आपसे अनुरोध करना चाहती हूं कि इस लेख को पढ़िए। गौरतलब है कि हाल ही में वर्ल्ड बैंक द्वारा जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत मे लागू जीएसटी दुनिया मे सबसे जटिल है।
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में शामिल होना और मोदी सरकार पर जमकर हमला बोलना उसके बाद विपक्षी नेताओं के लिए डिनर का आयोजन और अब कांग्रेस के अधिवेशन में मोदी सरकार पर सोनिया का जोरदार हमला यही बता रहा है कि भले ही राहुल अब कांग्रेस का चेहरा हैं लेकिन सोनिया ही अब भी कर्ता धर्ता की भूमिका में हैं।