मुजफ्फरनगर किसान महापंचायत में गरजे किसान नेता

तीन कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन को तेज़ी देने के लिए देशभर के किसान पांच सितंबर को मुजफ्फरनगर के जीआईसी मैदान में एकजुट होकर केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में खड़े होंगे।

किसान प्रदर्शन को देखते हुए बंद कराए जा सकते हैं ये सात मेट्रो स्टेशन, हाई अलर्ट पर है नई दिल्ली

किसान संगठनों का कहना है कि सत्र खत्म होने तक उनके 200 प्रतिनिधि रोज नई दिल्ली में इकट्ठा होंगे और संसद का घेराव करते रहेंगे जब तक उनके मुद्दे को सुलझाया नहीं जाता। इसे देखते हुए दिल्ली पुलिस हाई अलर्ट पर है। नई दिल्ली में सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं

किसान आंदोलन पर बोले कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर,कहा- आपने नाम पर करें राजनीति

देश मे इन दिनों किसानों का गुस्सा पूरे उफान में है। संसद द्वारा पारित तीन कृषि कानूनों को लेकर संशय ने उबाल को और बढ़ाया है।इसको लेकर राजनीति भी गर्म है। पिछले कई दिनों से लगातार पंजाब और हरियाणा के किसान दिल्ली कूच की जिद्द पर अड़े हैं और अब अंततः वह पहुंच चुके हैं।

नए कृषि कानून किसानों के जीवन में बदलाव लाने वाले अहम कदम हो रहे हैं साबित

नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि देश में कृषि सुधार और किसानों के हितों के संरक्षण के लिए बनाए गए ये कानून निश्चित ही क्रांतिकारी बदलाव लाएंगे, जिसका यह एक उदाहरण मात्र है।

मोदी सरकार का किसानों से किया बड़ा वादा आज होगा पूरा, पढ़ें

देश की पहली किसान स्पेशल ट्रेन मध्य रेल देवलाली से दानापुर के बीच चलाने जा रहा है। यह ट्रेन फिलहाल साप्ताहिक होगी।इस ट्रेन के माध्यम से जल्दी खराब होने वाले सामान की ढुलाई ससमय सुनिश्चित की जाएगी।

उद्योग की आड़ में खो रहे किसान

पूंजीपतियों और सरकार की मिलीभगत के आगे गरीब किसान की एक नही चलती और वह थक हार कर बैठ जाता है। साथ ही जब स्थित्ति बद से बदतर होती है तो उसके पास आत्महत्या के अलावा कोई विकल्प नही होता।

आत्महत्या के बढ़ते आंकड़ों के खिलाफ जब तेलंगाना में किसानों ने फूंक दी अपनी फसल

यूँ तो यह विरोध सिर्फ मिर्च की सही कीमत न मिलने को लेकर था लेकिन यह आंदोलन सभी किसानों के लिए एक प्रेरणा बन गया।

किसानों की लाश पर राजनीति कब तक

कर्ज़ माफी, सब्सिडी, खाद पानी हर तरह से यहां तक कि फसल नुकसान से लेकर हर वह कड़ी इस वादे का हिस्सा होती है जिससे किसान मोहित हो सके लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात पर आकर खत्म हो जाता है।

क्या एमपी में बड़ा चुनावी मुद्दा बनेगा किसान आत्महत्या?

सवाल है कि क्या राज्य में किसान आत्महत्या का मुद्दा चुनावी मुद्दा बनेगा या बस जात-धर्म और व्यक्तिगत बातों की बुनियाद पर चुनाव लड़ा जाएगा।

बुंदेलखंड जहां वादों की बरसात में सिर्फ राजनीति की फसल लहलहाती है, किसानों की नही

बुंदेलखंड के लिए हर बार चुनाव से पहले लंबे चौड़े वादे हर दल द्वारा किये जाते हैं लेकिन इस इलाके की तकदीर बदलने के मकसद से आज तक ऐसा कुछ होता नही दिखा जिससे उम्मीद जगी हो।

गुजरात मे यह कैसा विकास, किसानों की कब्रगाह बनता सौराष्ट्र

गुजरात के शहर अहमदाबाद से करीब 400 किलोमीटर दूर सौराष्ट्र के इलाके में विकास की नही तंगहाली की कहानियां गूंजती हैं। किसानों की आत्महत्या की खबर यहां आम बात है।