राहुल गांधी ने बतौर अध्यक्ष कांग्रेस के अधिवेशन के समापन सत्र को संबोधित किया इस दौरान वह लगातार मोदी सरकार और बीजेपी के साथ आरएसएस पर हमलावर रहे और जमकर शब्दबाण चलाये।
मोदी सरकार आज कई मोर्चों पर घिरी है। विपक्ष हमलावर है, नौजवान और किसान सड़क पर उतर प्रदर्शन करने में लगे हैं, सीमा पार से आतंकवाद और सीमा के अंदर नक्सलवाद के मुद्दे भी सरकार के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं।
क्षेत्रीय दलों के मन मे यह डर भी है कि कांग्रेस की स्वीकार्यता अभी भी 2014 जैसी ही है अजर मुमकिन है कि लोगों का समर्थन मोदी विरोध का बावजूद उसे न मिले।
भारत के लोकतंत्र में जिस तरह 2014 में मोदी सरकार पूर्ण बहुमत से सत्ता में आई और विपक्ष सिमटता चला गया वैसे में न सिर्फ सरकार निरंकुश हुई बल्कि विपक्ष भी कमजोर ही हुआ।
किसानों और युवाओं की उपेक्षा पर बोलते हुए राहुल ने कहा कि आज के समय मे नौजवान और किसान दोनों ही परेशान हैं और यही 2019 में बदलाव लाने की क्षमता भी रखते हैं।
उन्होंने अपने भाषण में कहा कि मैंने अपनी जिंदगी के 23 साल कांग्रेस में रहते हुए व्यर्थ गंवा दिए। आज जब मैं उस दौर को याद करता हूँ तो मुझे अफसोस होता है।
तीसरे मोर्चे की कवायद में कांग्रेस पूरी तरह तटस्थ है, उसका जनाधार भी खिसकता नजर आया है ऐसे में बीजेपी भी यह मान कर चल रही है कि कांग्रेस से ज्यादा खतरा के क्षेत्रीय गठबंधन और तीसरे मोर्चे से है।
डिजिटल इंडिया की बात करने वाली सरकार ऐसे यज्ञ के आयोजन की अगुवा बनेगी तो सवाल उठने लाजमी भी हैं. क्या सरकार ऐसे जवाब देगी? कैसे कड़ी कारवाई होगी? क्या सरकार के पास अब कोई मुद्दा और कारवाई का दमखम नहीं है?