घरेलू हिंसा की शिकार महिलाएं तेजी से लगा रही हैं मौत को गले

भारत में बेटियों को बोझ मानने वाले लोग नही हैं, डरने वाले लोग हैं। उनका डर ऐसे माहौल को देखते हुए स्वभाविक भी है। आज के तथाकथित समाज मे भी ऐसे पैसे और दहेज के भूखे हैं जो हर तरफ से परिपूर्ण होने के बावजूद दहेज के लोभ से खुद को दूर नही कर पा रहे

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, लेकिन दहेज न दिया तो उनका सुख भूल जाओ?

जब इस नारे को प्रचारित करते ब्रेक के बाद कोई समाचार प्रसारित होता है तो उसमें कोई न कोई, कहीं न कहीं की एक घटना ऐसी जरूर होती है जिसमे किसी न किसी महिला द्वारा आत्महत्या करने की बात बताई जाती है?