5 साल तक चुनाव जीत नदारद रहने वाले विधायकों की राह इस बार बिहार विधानसभा चुनाव में मुश्किल नजर आ रही है। लोकलुभावन वादे कर जीतने वालों से अब जनता हिसाब मांग रही है। क्षेत्रीय समस्याओं पर लोगों के गुस्से का सामना अभी तक बिहार में कई विधायक कर चुके हैं।
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बिहार चुनावों से पहले जानें किन दलों को मिला नया चुनाव चिन्ह, पप्पू को कैंची तो मांझी को पैन, जानें पूरा ब्यौरा
बिहार विधानसभा चुनावों की तैयारियां जारी है। कहीं एक दूसरे पर जम कर आरोपो के तीर चलाये जा रहे तो कहीं चुनावी बिसात पर ऐसी गोटियां बिछाई जा रही है जिससे जीत में कोई कोर कसर बाकी न रहे। गठबंधन में सीटों के बंटवारे अपर तो नेताओं में टिकट को लेकर उलझन की स्थिति है। इसी बीच चुनाव आयोग ने कुछ दलों को नया चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिया है।
Bihar Election- चिराग ने पीएम मोदी को चिट्ठी लिख की सीएम नीतीश की शिकायत- रिपोर्ट्स
बिहार में विधानसभा चुनावों की नजदीक आती तारीखों और तैयारियों के बीच अब जुबानी जंग भी तेज हो चली है। पाला बदलने के खेल के बाद अब दलों के अंदर जहां सहयोगियों पर दबाव बनाने की रणनीति अपनाई जा रही है वहीं विरोधियों पर भी जमकर हमला बोला जा रहा है। इन्ही सभी ख़बरों के बीच जब हाल ही बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और बिहार के सीएम नीतीश कुमार की मुलाकात हुई और उसके बाद लोजपा अध्यक्ष चिराग नरम पड़े तो लगा एनडीए में सब ठीक है।
बिहार चुनाव- सीट बंटवारे की उहापोह से परेशान दल, संभावित उम्मीदवारों में भी संशय की स्थिति
कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के बीच यह स्पष्ट हो गया है कि बिहार विधानसभा चुनाव अपने तय समय पर होंगे। इन चुनावों को लेकर दल और उनके नेता अपनी कमर कसने में कोई कोर कसर नबी छोड़ना चाहते हैं। बागियों को सहारा देने से न तो परहेज़ है न रूठे यारों को मनाने से लेकिन उस बीच एक संकट ऐसा है जो हर दल और गठबंधन के नेताओं में आम है।
इस दिन हो सकता है बिहार विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान, कोरोना काल मे चुनाव कराने वाला पहला राज्य होगा
बिहार विधानसभा चुनावों को लेकर सत्तापक्ष की जिद्द और विपक्ष की चुनाव न कराने की मांग के बीच अगले एक दो दिनों में चुनावों की तारीखों का ऐलान किया जा सकता है। कोरोना संकट के बीच बिहार ऐसा पहला राज्य होगा जहां चुनाव होंगे। माना जा रहा है कि निर्वाचन आयोग 13 सितम्बर को तारीखों का ऐलान कर सकता है। यह अनुमान इसलिए लगाए जा रहे क्योंकि वर्तमान विधानसभा के चुनावी तारीखों का ऐलान भी 9 सितम्बर को हुआ था।
चुनावी चूर्ण बाँटते नीतीश की तस्वीर शेयर कर बोले लालू, वर्चुअल-फर्चुअल नही एक्चुअल में बताओ..
लालू के ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते हुए लिखा गया कि 15 वर्षों में क्या-क्या काम किया दिखाओ, वर्चुअल-फ़र्चुअल नहीं ऐक्चूअल में बताओ? इसके साथ ही हैशटैग #Bihar rejectsnitish का भी प्रयोग किया गया।इसी ट्वीट के साथ नीतीश कुमार की एक तस्वीर कार्टून के रूप में साझा की गई। इस तस्वीर में लिखा गया नीतीश का प्रसिद्ध चुनावी चूर्ण।
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बिहार विधानसभा चुनावों की बिसात बिछने लगी है। नफा-नुकसान का आकलन शुरु हो गया है। इसी के साथ पहले शुरु हुआ नेताओं के पाला बदलने का खेल, फिर हुआ दल बदलने का खेल और अब शुरू है आरोप-प्रत्यारोप का दौर। आरोप प्रत्यारोप भी अगर सत्ता पक्ष और महागठबंधन के बीच हो तो शायद इसमें कुछ नया नही माना जाता लेकिन राजनीति में कुछ भी संभव है कि तर्ज पर पहले जहां मांझी, नीतीश के साथ आ मिले वहीं एनडीए के पुराने पार्टनर लोजपा ने मोर्चा खोल दिया।
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बिहार विधानसभा चुनावों को लेकर अब दल और नेता सक्रिय नजर आने लगे हैं। समीकरण साधने के लिए क्या दुश्मन क्या दोस्त सब जायज है। कहीं रूठे यारों को मनाने का क्रम जारी है तो कहीं पाला बदल सुरक्षित हो जाने की जद्दोजहद है वहीं हमेशा की तरह सत्ता पक्ष के तरकश में शिलान्यास, उद्घाटन के साथ हर वर्ग को लुभाने के लिए कुछ न कुछ वादे हैं।
मांझी के बाद एमपी के इस नेता को साथ करने में लगे हैं नीतीश, 2018 में तोड़ गए थे नाता
आगामी बिहार विधानसभा चुनावों के बीच कोई भी दल या नेता किसी भी तरह का कोई कोर कसर नही छोड़ना चाहता है। यही वजह है कि वोट बैंक और जातिगत समीकरण को ध्यान में रखते हुए चुनावी समीकरण के हिसाब से लाभ-हानि का गणित लगाया जा रहा है। इसी क्रम में जीतन राम मांझी जहां अब नीतीश कुमार के साथ हैं वहीं अब एक और बड़े नेता को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ चली है।
नीतीश के खेवनहार बनें मांझी, लोजपा के तंज पर दी कड़ी प्रतिक्रिया
बिहार विधानसभा चुनावों को लेकर गहमागहमी बढ़ गई है। इसी के साथ बढ़ी है बयानबाजी भी और पाला बदलने का दौर भी शुरू हो चुका है। कल तक महागठबंधन के साथ रहे हिंदुस्तान आवाम मोर्चा सुप्रीमो जीतनराम मांझी अब खुलकर एनडीए के साथ हैं और नीतीश के सपोर्ट में जोरदार बैटिंग करते नजर आ रहे हैं। वहीं लोजपा और चिराग के बयान से यह भी बहुत साफ हो रहा कि शायद एनडीए में सब ठीक नही है।
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जन अधिकार पार्टी सुप्रीमों पप्पू यादव बिहार चुनावों के मद्देनजर एक्टिव नजर आने लगे हैं। पिछपे साल जब पटना डूबा तब से लेकर इस साल उत्तर बिहार में आई बाढ़ तक राजनीति में अगर कोई नाम सबसे आसानी से और ज्यादा लोगों की जुबान पर चढ़ा तो वह नाम पप्पू यादव का ही था। वह निर्भीक रूप से सत्ता और मुख्य विपक्षी दल के खिलाफ अब ताल ठोकते नजर आ रहे हैं।
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बिहार विधानसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच दल और इसके नेता अब एक्टिव नजर आने लगे हैं। यूँ तो यह माना जा रहा है कि सत्ता की मुख्य लड़ाई राजद की अगुवाई वाली महागठबंधन और नीतीश कुमार की अगुवाई वाली महागठबंधन के बीच ही होगी। हालांकि इससे इनकार नही किया जा सकता कि कई छोटे दलों की मौजूदगी इस खेल को खराब करने का माद्दा रखती है।
बिहार- NDA में फिलहाल सब ठीक, नड्डा के बयान से मिला संदेश
बिहार में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं। निर्वाचन आयोग ने कोरोना महामारी के इस दौर में चुनाव से संबंधित गाइडलाइंस भी जारी कर दी है और इसके साथ ही राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप से लेकर दल बदल और चुनावी सुगबुगाहट भी तेज हो गई है। एक दूसरे पर जम कर निशाना साधा जा रहा है वहीं मुद्दों के लिए जनता की नब्ज टटोलने के साथ संभावित प्रत्याशी की भी खोज हर दल में शुरू हो गई है।
एनडीए की नाव पर माँझी की सवारी तय, महागठबंधन का छोड़ा साथ
बिहार विधानसभा चुनाव के किये जैसे जैसे दिन कम होते जा रहे हैं और चुनावी समर नजदीक आ रहा है वैसे-वैसे हर दिन नए समीकरण बनते और बिगड़ते दिख रहे हैं। इसी क्रम में कभी नीतीश से अलग होकर अपनी पार्टी बनाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने आज महागठबंधन का साथ छोड़ दिया है। इसी के साथ यह लगभग स्पष्ट है कि आने वाले कुछ दिनों में वह एनडीए के हिस्सा बनेंगे। श्याम रजक के जदयू से जाने के बाद मांझी की वापसी को डैमेज कंट्रोल के रूप में देखा जा रहा है।
सुशांत के पिता ने खुद को घोषित किया सुशांत का कानूनी वारिस, किसी और ने अब कुछ बोला तो…
सुशांत सिंह राजपूत के पिता के के सिंह ने खुद को अपने बेटे सुशांत सिंह राजपूत का कानूनी वारिस घोषित किया है। उन्होंने यह फैसला ऐसे वक्त में लिया है जब मीडिया में कुछ लोगों ने बयान जारी कर कहा था कि सुशांत ने उन्हें हायर किया था एयर उनकी सेवाएं ले रहा थे। इस बारे में बोलते हुए सुशांत के पिता ने कहा कि वकीलों ने सुशांत और उनके बीच हुई बातचीत के बारे में बताया जो कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया और इंडियन एविडेंस एक्ट के खिलाफ है।
जारी है बिहार चुनावों से पहले दल बदलने का सिलसिला, अब लालू के समधी आए नीतीश के पाले
बिहार विधानसभा चुनाव की बढ़ती सरगर्मियों और तैयारियों के बीच पाला बदलने का खेल बदस्तूर जारी है। बड़े नामों की बात करें तक नीतीश सरकार में उद्योग मंत्री और जदयू के बड़े दलित नेता माने जाने वाले श्याम रजक ने नीतीश का साथ छोड़ राजद के दामन थाम लिया था। उसके बाद से लगातार इस दल से उस दल में नेताओं के आने जाने का सिलसिला अनवरत जारी है।
