शाह नही यह शख्स है कश्मीर का गेमचेंजर, अभी नही तो कभी नही सुधरेंगे हालात?

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में जब बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल एक दूसरे से मिले तो किसी को भी यह अंदाजा नही था कि इतना बड़ा फैसला लिया जा सकता है।

पूर्वोत्तर के इस राज्य में दक्षिण के राज्यपाल, क्या हैं इसके मायने?

केरल बीजेपी के इकाई प्रमुख रह चुके कुम्मनम राजशेखरन को मिजोरम का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वह शपथ लेकर अपना कार्यभार भी संभाल चुके हैं लेकिन उनकी नियुक्ति का विरोध कई स्थानीय राजनीतिक और अन्य संगठन कर रहे हैं।

इस नेता की छवि ही बनी ऐसी, बदनाम हुए तो क्या हुआ नाम तो हुआ

आज उम्र के इस पड़ाव में जेल में जीवन बिताने को बाध्य कर दिया। इसके बावजूद न लालू झुके, न बदला उनका तेवर और अंदाज़। इसलिए तो कहते हैं कि लालू बदनाम तो हुए लेकिन नाम भी खूब हुआ।

क्या मोदी के खिलाफ राहुल से बढ़िया विकल्प बन सकती थी प्रियंका?

कांग्रेस के कार्यकर्ता भी कई बार खुल कर तो कभी दबे जुबान से यह मान चुके हैं कि राहुल से अच्छी राजनीतिक समझ प्रियंका की है।

विरोधियों को छोड़िये अब सहयोगी भी नही दे रहे बीजेपी-कांग्रेस को भाव

कांग्रेस को कोई भी क्षेत्रीय दल तवज्जो देता नही दिख रहा और बीजेपी किसी अन्य दल को अपने सामने तवज्जो दे उनका ग्राफ बढ़ाना नही चाहती है। यही वजह है कि हर जायज-नाजायज मांग मानने के बदले बीजेपी ने डिफेंड करना ही सही समझा है।

प्रशांत किशोर की मोदी से मुलाकात, क्या फिर संभालेंगे प्रचार की कमान?

प्रशांत किशोर ही वह व्यक्ति थे जिन्होंने बीजेपी के प्रचार की कमान संभाल रखी थी और ब्रांड मोदी की सुनामी पूरे देश मे खड़ी कर दी थी। अब प्रशांत किशोर एक बार फिर चर्चा में हैं। चर्चा में होने की वजह कुछ दिनों पहले पीएम से हुई उनकी मुलाकात है।

भाषण दें घिरी सोनिया, हो गईं ट्रोल

उन्होंने कहा कि इंदिरा जी की शानदार जीत ने देश की राजनीति को ‘बलात्कार’ रख दिया। जबकि इसकी जगह उन्हें पलटकर या बदलकर रख दिया बोलना था।

कांग्रेस के अधिवेशन में राहुल को मिल गई सुपर पावर

कांग्रेस के प्लेनरी सेशन में पार्टी अधिकारियों और शीर्ष नेताओं की मौजूदगी में एक ऐसे प्रस्ताव पर मुहर लग गई जिसमें राहुल गांधी को यह अधिकार होगा कि वह अपनी नई टीम खुद चुनें।

कांग्रेस के अधिवेशन में एक्टिव दिखीं प्रियंका, संभाली यह बड़ी जिम्मेदारी

क्रिय राजनीति में न होने के बावजूद कई ऐसे मौके आये हैं जब वह पार्टी की कमान पर्दे के पीछे रह कर थामती नजर आई हैं।

जब इस नेता ने कहा सोनिया राहुल को छोड़ कोशिश करूंगा सबको बीजेपी में ले आऊं

उन्होंने अपने भाषण में कहा कि मैंने अपनी जिंदगी के 23 साल कांग्रेस में रहते हुए व्यर्थ गंवा दिए। आज जब मैं उस दौर को याद करता हूँ तो मुझे अफसोस होता है।

तो क्या रोजगार के आंकड़ों को लेकर झूठ बोल रहे राहुल?

चार साल के अंदर 11 करोड़ लोग स्वरोजगार से जुड़े हैं। क्या यह आंकड़ा उन्हें नही पता? मोदी सरकार ने मुद्रा योजना के तहत यह स्वरोजगार पैदा किये हैं

जीएसटी को गब्बर सिंह टैक्स बता राहुल ने ली थी मोदी की चुटकी

राहुल ने जीएसटी का विरोध करते हुए इसे गब्बर सिंह टैक्स कहा। ऐसा कहने के पीछे उनका तर्क यह था कि इस टैक्स के लगने के बाद से इसका असर लाखों लोगों के वयापार पर पड़ा है और इसके प्रतिकूल असर देखने को मिले हैं।

शाह, मोदी के लिए सबसे बड़ी चुनौती हैं यह मुद्दे, क्या चुनाव के लिए तैयार है सरकार?

हाल के दिनों में सरकार रोजगार से लेकर दलित आंदोलन, अर्थव्यवस्था से लेकर बैंकिंग और शिक्षा से लेकर सड़क तक चुनौतियों का सामना कर रही है।

ऐसा देश है मेरा, जहां करोड़ो लेने वाला सुरक्षित है और अन्नदाता कर्ज के बोझ से आत्महत्या कर रहा है

उस देश की महानता पर जहां हज़ारों, करोड़ों लेकर देश से भाग जाने वाले लोग सुरक्षित हैं और महज कुछ हजार का कर्ज लेने वाला किसान कर्ज न लौटाने की स्थिति में ट्रेक्टर से कुचल कर मार दिया जाता है या भ्रष्ट सरकारी कार्यप्रणाली से तंग आकर आत्महत्या कर लेता है?

ममता को हाई कोर्ट कि फटकार कहा न करें दरार पैदा करने कि राजनीति

यह सारा विवाद तब उत्पन्न हुआ जब ममता सरकार ने मुहर्रम को तवज्जो देते हुए विजयादशमी के बाद सिर्फ 6 बजे तक मूर्ति विसर्जन कि अनुमति दी थी.