भारतीय कुश्ती के दिग्गज दारा सिंह न केवल रिंग के बादशाह थे, बल्कि उन्होंने सिनेमा की दुनिया में भी अपनी खास पहचान बनाई। 175 से अधिक फिल्मों में अभिनय करने वाले दारा सिंह ने 1980 में मोहाली (पंजाब) में दारा फिल्म स्टूडियो की स्थापना भी की थी। उन्होंने कई फिल्मों का निर्देशन किया और टीवी सीरियल रामायण में ‘हनुमान’ की भूमिका निभाकर देशभर में प्रसिद्धि पाई।
अपने करियर के दौरान दारा सिंह ने विभिन्न भाषाओं की फिल्मों में काम किया। इनमें से एक थी मलयालम फिल्म मुथारामकुन्नू पो (1985)। यह फिल्म अभिनेता-निर्देशक श्रीनिवासन द्वारा लिखी गई थी और इसका निर्देशन सिबी मलयिल ने किया था। हाल ही में जब फिल्म के 40 साल पूरे हुए, तो टीम ने दारा सिंह से जुड़ी दिलचस्प यादें साझा कीं।
फिल्म के मुख्य अभिनेता मुकेश ने बताया कि शूटिंग के दौरान दारा सिंह को बेहद सादगी पसंद थी। “उन्होंने कहा था – मुझे बस एक ऐसा कमरा चाहिए जिसमें दो खिड़कियाँ हों, एक से हवा अंदर आए और दूसरी से बाहर जाए।” मुकेश ने बताया कि दारा सिंह के खानपान को लेकर भी सबकी धारणाएँ गलत निकलीं। वह शाकाहारी थे और केवल “तीन चपाती, दाल और प्याज़” खाते थे।
फिल्म के लिए दारा सिंह ने ₹25,000 लिए थे। हालांकि उन्होंने प्रोडक्शन टीम की लगभग हर शर्त मान ली, लेकिन एक बात पर अड़ गए ,फिल्म के क्लाइमेक्स पर। कहानी के अनुसार, दारा सिंह को अंत में हारना था ताकि नायक की प्रेम कहानी पूरी हो सके। मगर सिंह ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “मेरे दर्शक मुझे हारते हुए नहीं देख सकते, वे मुझसे हमेशा जीत की उम्मीद रखते हैं।”
आखिरकार, फिल्म का क्लाइमेक्स बदला गया ,दारा सिंह तकनीकी कारणों से मुकाबला अधूरा छोड़ते हैं, जिससे नायक विजेता बनता है, पर दारा सिंह की ‘हार’ नहीं दिखाई जाती। यह बदलाव आज भी फिल्म की सबसे दिलचस्प बातों में गिना जाता है।
