सुप्रीम कोर्ट में आज एक चौंकाने वाली घटना घटी जब एक बुजुर्ग व्यक्ति ने मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई पर जूता फेंक दिया। हालांकि जूता बेंच तक नहीं पहुंचा और कोर्ट की सुरक्षा टीम ने तुरंत आरोपी को हिरासत में ले लिया।
हंगामे के बीच भी CJI गवई ने शांत रहते हुए कहा, “मैं ऐसी चीजों से प्रभावित होने वाला आखिरी व्यक्ति हूं,” और कार्यवाही सामान्य रूप से जारी रखी।
घटना के वक्त आरोपी व्यक्ति ने नारे लगाए — “सनातन का अपमान भारत नहीं सहेगा” — और फिर जूता उछाल दिया। उसके पास सुप्रीम कोर्ट का प्रॉक्सिमिटी कार्ड था, जिससे संकेत मिलता है कि वह वकील या क्लर्क हो सकता है। उसकी पहचान किशोर राकेश के रूप में हुई है। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां उससे पूछताछ कर रही हैं।
यह हमला तब हुआ जब हाल ही में CJI गवई को भगवान विष्णु पर की गई टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर आलोचना झेलनी पड़ी थी। एक मूर्ति पुनर्निर्माण याचिका को खारिज करते हुए उन्होंने कहा था, “जाइए, स्वयं भगवान से कहिए कुछ करें।” इस बयान को लेकर धार्मिक भावनाएं आहत हुईं, हालांकि बाद में उन्होंने सफाई दी, “मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूं।”
वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने घटना को “जातिवादी हमला” करार देते हुए इसकी न्यायिक जांच की मांग की। उन्होंने कहा, “यह सुप्रीम कोर्ट की गरिमा पर सीधा हमला है और सभी न्यायाधीशों को मिलकर इसकी निंदा करनी चाहिए।”
कोर्ट में मौजूद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया को “अति-प्रतिक्रियात्मक” बताया। घटना के बाद कोर्ट की कार्यवाही बिना किसी विघ्न के जारी रही, जिससे CJI की स्थिरता और मर्यादा का परिचय मिला।
