संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ़ के बयानों पर भारत ने सख़्त प्रतिक्रिया दी। भारतीय राजनयिक पेटल गहलोत ने अपने “अधिकार-ए-जवाब” (Right of Reply) का इस्तेमाल करते हुए कहा कि पाकिस्तान की विदेश नीति का केंद्रबिंदु आतंकवाद है।
गहलोत ने पाकिस्तान पर ‘द रेज़िस्टेंस फ्रंट’ जैसे आतंकी संगठनों को बचाने और अल-कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को पनाह देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “किसी भी स्तर का नाटक और झूठ सच्चाई नहीं छिपा सकता।”
गहलोत ने यह भी उजागर किया कि 10 मई को पाकिस्तान ने खुद भारत से संघर्षविराम की गुहार लगाई थी। उन्होंने तीखे अंदाज़ में कहा, “यदि तबाह रनवे और जली हुई हवाई पट्टियां जीत का सबूत हैं, तो पाकिस्तान इस ‘जीत’ का आनंद ले सकता है।”
पाक पीएम शरीफ़ ने अपने संबोधन में भारत पर “अनुचित आक्रामकता” और सिंधु जल संधि को तोड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जल समझौते का उल्लंघन “युद्ध की कार्रवाई” है।
भारत ने इन आरोपों को खारिज करते हुए साफ किया कि पाकिस्तान यदि ईमानदारी से शांति चाहता है, तो उसे सभी आतंकी शिविर बंद कर भारत को वांछित आतंकियों को सौंपना होगा।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच से दोहराया कि आतंकवाद पर कोई समझौता नहीं होगा — “आतंकवादियों और उनके संरक्षकों, दोनों को सज़ा मिलेगी।”
