थाईलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री और सबसे विवादित नेता ठाकसिन शिनावात्रा को सुप्रीम कोर्ट ने एक साल की जेल की सज़ा सुनाई है। अदालत ने माना कि 2023 में उन्हें जेल की बजाय अस्पताल में सज़ा काटने की इजाज़त देना क़ानूनन गलत था।
76 वर्षीय ठाकसिन अगस्त 2023 में लंबे निर्वासन के बाद थाईलैंड लौटे थे। उन्हें भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के मामलों में आठ साल की सज़ा सुनाई गई थी। हालांकि, उन्होंने एक भी रात जेल में नहीं बिताई। उन्हें निजी अस्पताल में रखा गया, फिर सज़ा को शाही माफी से घटाकर एक साल कर दिया गया और बुजुर्ग कैदियों के लिए राहत योजना के तहत रिहा भी कर दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया, “अस्पताल में रहना जेल की सज़ा नहीं माना जा सकता। उनकी बीमारी तत्कालीन गंभीर नहीं थी।” अदालत ने आदेश दिया कि उन्हें तुरंत बैंकॉक रिमांड जेल भेजा जाए।
ठाकसिन अपने परिवार के साथ अदालत पहुँचे और मुस्कुराते हुए मीडिया के कैमरों में पोज़ दिए। उनकी बेटी और राजनीतिक वारिस पैटॉंगटार्न ने कहा, “मेरे पिता अब भी लोगों के लिए एक आध्यात्मिक नेता हैं और जनता की ज़िंदगी सुधारने की सच्ची नीयत रखते हैं।”
ठाकसिन के परिवार की राजनीति पिछले दो दशकों से थाईलैंड की सैन्य और शाही समर्थक ताक़तों के ख़िलाफ़ रही है। लेकिन हालिया झटकों से उनका दबदबा कमजोर होता दिख रहा है। बीते दिनों ही पैटॉंगटार्न को प्रधानमंत्री पद से हटाया गया और अब सुप्रीम कोर्ट का यह फ़ैसला शिनावात्रा वंश के लिए एक और बड़ा झटका माना जा रहा है।
