संसद का मानसून सत्र 2025 चर्चा से ज़्यादा हंगामे के लिए याद रखा जाएगा। विपक्ष के लगातार विरोध और नारेबाज़ी के बीच सरकार ने एक के बाद एक कई अहम बिल लोकसभा और राज्यसभा से पारित करवा लिए — वो भी बिना किसी ठोस बहस के।
विपक्ष ने मणिपुर हिंसा, बेरोज़गारी, महंगाई और केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा की मांग को लेकर दोनों सदनों में हंगामा किया। कई बार सांसद वेल में उतर आए और प्रधानमंत्री से बयान की मांग करते रहे। सरकार ने इसे “जानबूझकर बाधा डालना” बताया और विधायी कामकाज को आगे बढ़ाया।
इस सत्र में ऑनलाइन गेमिंग, खेल प्रशासन, खनन, कर कानून, पोर्ट्स, शिपिंग और IIM जैसे क्षेत्रों से जुड़े 15 से अधिक अहम बिल पारित हुए। इनमें शामिल हैं:
- नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस बिल, 2025
- इनकम टैक्स और टैक्सेशन लॉ (संशोधन) बिल, 2025
- ऑनलाइन गेमिंग विनियमन बिल, 2025
- मर्चेंट शिपिंग बिल, 2025,
- माइंस एंड मिनरल्स संशोधन बिल, 2025
सरकार का कहना है कि “कानून बनाना देश की ज़रूरत है, संसद को विपक्ष की राजनीति का बंधक नहीं बनाया जा सकता”। वहीं, विपक्ष ने इसे लोकतंत्र की अनदेखी बताते हुए कहा कि “बिना बहस बिल पास करना संसद की गरिमा के ख़िलाफ़ है।”
नतीजा- सत्र तो चला, पर संवाद गायब रहा।
