श्रद्धा में मौत का साया- कुबेरेश्वर धाम में कांवड़ यात्रा बनी कब्रगाह

“आस्था लेकर आए थे, अब डर लेकर लौट रहे हैं…” मध्य प्रदेश के सीहोर स्थित कुबेरेश्वर धाम में आयोजित भव्य कांवड़ यात्रा में बीते 72 घंटों में 6 श्रद्धालुओं की मौत ने व्यवस्था की पोल खोल दी है।

उपेन्द्र (22) गोरखपुर, दिलीप सिंह (57) रायपुर, चतुर सिंह (50) गुजरात, ईश्वर सिंह (65) हरियाणा, जसवंती बेन (56) राजकोट और संगीता गुप्ता (48) फिरोजाबाद— ये सभी लोग आस्था से ओतप्रोत होकर पहुंचे थे, लेकिन अव्यवस्था, गर्मी, भीड़ और थकावट ने उनकी जान ले ली।

पंडित प्रदीप मिश्रा द्वारा आयोजित इस यात्रा में लाखों की भीड़ उमड़ी, लेकिन प्रशासन और आयोजन समिति दोनों नाकाम रहे। पीने का पानी, शौचालय, भोजन, यहां तक कि भीड़ नियंत्रण तक के बुनियादी इंतज़ाम पूरी तरह फेल हो गए।

इंदौर-भोपाल हाईवे जाम से जूझता रहा, हजारों वाहन फंसे रहे। पुलिस के वैकल्पिक रूट और भारी वाहनों पर प्रतिबंध भी कागज़ों तक ही सीमित रह गए।

कैबिनेट मंत्री गोविंद राजपूत ने माना कि “भीड़ उम्मीद से कहीं ज्यादा है, व्यवस्था कम पड़ गई है।”

लेकिन अब सवाल उठ रहे हैं— जिम्मेदारी कौन लेगा?

पूर्व मंत्री डॉ. राजेन्द्र सिंह ने तीखा सवाल किया: “श्रद्धा के नाम पर मौत क्यों?” विपक्ष के नेता उमंग सिंघार बोले, “धर्म के नाम पर जान से खिलवाड़ कोई नहीं कर सकता।”

श्रद्धालु अब सिर्फ एक सवाल पूछ रहे हैं – “क्या हमारी आस्था का यही अंत है?”

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