चुनाव आयोग ने हाल ही में अपनी आलोचना करने वालों को स्पष्ट शब्दों में जवाब दिया है। आयोग ने लोकतंत्र की मूल भावना और निष्पक्ष चुनावों की अहमियत पर ज़ोर देते हुए कहा, “भारत का संविधान, भारतीय लोकतंत्र की जननी है। ऐसे में कुछ लोगों के कहने पर, क्या चुनाव आयोग मृत मतदाताओं, स्थायी रूप से पलायन कर चुके मतदाताओं, दो जगह पंजीकृत वोटरों, फर्जी और विदेशी वोटरों के नाम पर वोट डालने का रास्ता साफ कर दे? क्या यह संविधान के खिलाफ नहीं होगा?”
आयोग ने यह भी कहा कि वह पारदर्शी प्रक्रिया के ज़रिए जो प्रामाणिक वोटर लिस्ट तैयार करता है, वही निष्पक्ष चुनाव और मज़बूत लोकतंत्र की नींव है। बयान में यह भी जोड़ा गया कि, “इन सवालों पर राजनीतिक विचारधाराओं से ऊपर उठकर हम सभी को और पूरे देशवासियों को कभी न कभी गहराई से सोचना ही पड़ेगा। और शायद वह समय अब आ गया है।”
इस बयान को लेकर माना जा रहा है कि चुनाव आयोग ने यह प्रतिक्रिया उन आलोचनाओं के जवाब में दी है, जहां वोटर लिस्ट को लेकर पक्षपात या छेड़छाड़ के आरोप लगे हैं।
आयोग ने यह साफ किया है कि लोकतंत्र को मज़बूत करने के लिए सही वोटर लिस्ट बनाना कोई विकल्प नहीं, बल्कि एक ज़रूरत है — और उस पर समझौता नहीं किया जा सकता।
