यूपी में चुनावी मौसम चल रहा हैं और साथ ही मुख्यमंत्री जी ,योगी आदित्यनाथ का कैराना दौरा। यह महज संयोग है या विपक्ष के कदम को कुंद करने की भाजपा की कोई रणनीति।

जब कैराना में योगी जी पहुंचे तो उन्होंने उन लोगों के दर्द पर मरहम लगाया जो कभी दंगों का शिकार हुए थे। इस दौरान उन्होंने विपक्ष खासकर समाजवादी पार्टी पर निशाना साधने से भी नहीं हिचकिचाए।

योगी ने कहा, हम उत्पीड़न के पीड़ितों को मुआवजा देंगे. जिन लोगों ने यहां कैराना को नष्ट करने की कोशिश की है, जैसे मारीच और सुबाहू को नुकसान हुआ है। मारीच और सुभु की तरह ये भी आने वाले समय में दुर्भाग्य के शिकार होंगे।

यह विश्वामित्र का बलिदान है। सीएम ने कहा, जो कश्मीर में धारा 370 के खात्मे का विरोध करते थे, ये लोग कब खुश होते हैं… जब मुजफ्फर नगर में दंगा होता है…जब कैराना से पलायन होता है…और जब अफगानिस्तान जब भारत में तालिबान का शासन होता है, तब उनके नारे उठाए जाते हैं वे बोले हम तालिबानीकरण की बिल्कुल भी अनुमति नहीं देंगे और जो कोई भी उत्तर प्रदेश की धरती पर तालिबान का समर्थन करेगा, उससे सरकार सख्ती से निपटेगी।

तालिबानी मानसिकता को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। “बीजेपी सब कुछ बेच देगी और सरकार इसे आउटसोर्स करेगी” अखिलेश का ताना! योगी जी ने कहा की यह समाज को मध्य युग में ले जाने का एक दुर्भावनापूर्ण प्रयास है।

जिससे बहन-बेटियों का जीवन पूरी तरह से नारकीय हो जाता है। नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन। जो लोग केवल और केवल धार्मिक जुनून के साथ रहते हैं, वे इस तालिबानी कुकर्मों का समर्थन कर रहे हैं। इसे उत्तर प्रदेश की धरती पर कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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