एक तरफ जहां दक्षिण भारत में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है वहीं इस बीच केरल में निपाह वायरस से 12 साल के बच्चे की मौत का मामला सामने आया है। केरल राज्य के कोझीकोड में निपाह वायरस के संक्रमण में आने से 12 साल के बच्‍चे को एक निजी अस्‍पताल में भर्ती कराया गया था, जहां रविवार सुबह उसकी मौत हो गई।

इसके बाद केंद्र की एक टीम कोझीकोड पहुंच गई है। राज्य की पिनराई सरकार ने लोगों को भरोसा दिया है कि इससे घबराने की जरूरत नहीं है। इस बीच मीडिया से बात करते हुए राज्य की की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने बताया कि रविवार को सुबह 5 बजे बच्चे की मौत हो गई।

पुणे की एनआईवी(NIV) ने निपाह वायरस के मौजूदगी की पुष्टि की। साथ ही जो भी संपर्क में आए उन सबको अलग किया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने आगे बताया कि दक्षिण भारत में पहला निपाह वायरस रोग केरल के कोझीकोड जिले में 19 मई 2018 को दर्ज किया गया था।

राज्य में 1 जून 2018 तक 17 मरीजों की मौत हुई थी और 18 मामलों की पुष्टि हुई थी। केंद्र सरकार ने राज्य में रविवार को राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र की एक टीम भेजी है। मंत्रालय ने भरोसा दिलाया कि टीम राज्य को तकनीकी सहायता मुहैया कराएगी। केरल के कोझीकोड और मलप्पुरम जिलों में 2018 में निपाह वायरस का प्रकोप देखा गया था।

जानकारों बताते हैं कि निपाह एक जूनोटिक वायरस है जो जानवरों से इंसानों में फैल सकता है। इसके साथ ही यह एक इंसान से दूसरे इंसान में भी फैलता है। पहली बार यह मलेशिया में सुअर का पालन करने वाले किसानों के बीच पहचाना गया था।

कहा जाता है कि निपाह चमगादड़ों की लार और सूअर के संपर्क में आने से फैलता है। सिंगापुर में इसका मामला सामने आने की वजह चमगादड़ था। भारत में यह रोग पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में साल 2001 और 2007 में सामने आया था। हालांकि यह वायरस ज्यादातर एक क्षेत्र तक सीमित था लेकिन इसके संपर्क में आने से यह संक्रमण फैलता है।

डब्ल्यूएचओ बताता है कि इसके लक्षण में शुरू में बुखार, सिरदर्द, उल्टी, गले में खराश जैसी शिकायत होती है, उसके बाद कमजोरी आना, चक्कर आना, नींद आना जैसे तमाम न्यूरोलॉजी संक्रमण आते है। कुछ लोगों में निमोनिया की शिकायत और सांस लेने में दिक्कत आती है। लक्षण सामने आने के बाद रोगी 24- 48 घंटे में कोमा में भी जा सकते है। निपाह के इन्फेक्शन लगने और लक्षण के उभरने के बीच का समय 4 से 14 दिन के बीच होता है।

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक अभी तक इसके लिए कोई भी खास दवा या वैक्सीन नहीं बनाई गई है।

हालांकि सलाह यह होती है कि अगर किसी इलाके में निपाह का आउटब्रेक संभावित है तो जानवरों के रहने वाले एरिया को तत्काल को अलग कर देना चाहिए। संक्रमित जानवरों का मारना चाहिए और मारे गए जानवरों को सावधानी के साथ जला देना चाहिए या गहरे दफना देना चाहिए।

संक्रमित स्थलों पर दूसरे जानवरों की आवाजही बंद कर देनी चाहिए। राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र ने कहा है कि जो लोग निपाह के संक्रमित जानवरों या इंसानों के बीच आए हों उनको साबुन और पानी से अच्छी तरह से हाथ धोना चाहिए और अधखाए या जूठे फलों को खाने से बचना चाहिए।

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