बिहार विधानसभा चुनावों के बीच दलों और नेताओं के बयान इन दिनों सुर्खियों में हैं। कहीं आरोप प्रत्यारोप के तीर चलाये जा रहे तो कहीं निजी संपत्ति और बातों का ब्यौरा भी पेश किया जा रहा है।

इसी क्रम में एनडीए से अलग होकर जदयू के खिलाफ और बीजेपी के साथ रहने का एलान कर चुकी लोजपा में क्या सब ठीक है यह सवाल इन दिनों राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसके पीछे वजह है लोजपा अध्यक्ष चिराग के चाचा पशुपति पारस के दो अलग-अलग बयान।


दरअसल अभी से कुछ घंटे पहले चिराग के चाचा और रामविलास पासवान के छोटे भाई पसुपति कुमार पारस ने बिहार के सीएम नीतीश कुमार की जमकर तारीफ की थी हालांकि आज चिराग से मिलने के बाद वह अपने बयान से पलट गए और मीडिया पर ही अपने बयान को तोड़ मरोड़कर पेश करने का तोहमत मढ़ दिया।

हालांकि कल और आज के बयान में एक बात आम थी और वह बात यह थी कि मैं 20 अक्टूबर के बाद राजनीति से जुड़ी बातें करूंगा। आपको बता दें कि 20 को रामविलास पासवान का श्राद्धकर्म सम्पन्न होगा। 


चिराग से मुलाकात के बाद पशुपति पारस ने अपने बयान में कहा कि,’बिहार में 15 वर्ष से शासन में है लेकिन बिहार का विकास नहीं हुआ। अभी जो काम दिख रहे हैं वो भारत सरकार का काम है। राज्य के जिला अस्पतालों में दवा, डाक्टर से लेकर अन्य चीजों की भारी कमी है।

कई जगहों पर अस्पताल के बेड पर कुत्ता बैठने की तस्वीर भी आयी है। शिक्षा को लेकर भी सरकार फेल रही है। बिहार में युवाओं को रोजगार नहीं मिल पा रहा है।’ उन्होंने सुशील मोदी के लोजपा को वोटकटवा कहने के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह 10 नवम्बर को पता चलेगा।