कोरोना के इस दौर में जब लाखों लोग या तो नौकरी खो चुके हैं या तो उन्हें अपनी नौकरी गंवाने के डर है ऐसे वक्त में नौकरी की चाह रखने वालों को रेलवे ने बड़ा झटका दिया है। रेलवे ने 6 अगस्त को जारी एक आदेश में कहा है कि अब खलासियों की भर्ती नहीं होगी। रेलवे बोर्ड के आदेश के मुताबिक टेलीफोन अटेंडेंट-कम-डाक खलासी (टीएडीके) की भर्तियों के मामले का रिव्यू किया जा रहा है। 1 जुलाई से अब तक टीएडीके की जो भी भर्तियां मंजूर हुई हैं, उनकी भी समीक्षा की जा सकती है। साथ ही आने वाले वक्त में इस पद पर कोई भी बहाली नही की जाएगी।

टीएडीकेे को बंगला प्यून भी कहा जाता है। ये रेलवे के सीनियर अफसरों के घरों पर सहायक के रूप में काम करते हैं। रेलवे की यह व्यवस्था काफी पहले से चली आ रही है। टीएडीके को शुरुआत में करीब 15 हजार रुपए मिलते हैं। तीन साल बाद इन्हें स्थायी कर दिया जाता है। उसके बाद 20 हजार रुपए और दूसरे फायदे भी मिलते हैं।

रेलवे में पद समाप्त करने या बहाली रोकने का यह कोई पहला मामला नही है। इससे पहले भी रेलवे ने सैन्य इंजीनियरिंग सेवा(MES) के 9,304 पदों को समाप्त करने की घोषणा की थी। यह फैसला 7 मई को लिया गया था।