ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीयर स्टारमर भारत दौरे पर मुंबई पहुंचे, और उनके कार्यक्रमों की शुरुआत ही एक दिलचस्प मुलाकात से हुई — आधार परियोजना के जनक और यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) के चेयरमैन नंदन नीलेकणी से। मुलाकात का मकसद था — ब्रिटेन में भारत की तरह एक डिजिटल पहचान प्रणाली लागू करने की योजना पर चर्चा।
बीते महीने स्टारमर ने घोषणा की थी कि ब्रिटिश नागरिकों और स्थायी निवासियों के लिए डिजिटल ID कार्ड अनिवार्य किया जाएगा, ताकि अनधिकृत प्रवास और भूमिगत अर्थव्यवस्था को रोका जा सके। उन्होंने कहा — “आप यूनाइटेड किंगडम में डिजिटल ID के बिना काम नहीं कर पाएंगे — यह इतना ही सीधा है।”
स्टारमर ने भारत के Aadhaar मॉडल की खुलकर तारीफ की और कहा — “हम ऐसे देश जा रहे हैं जहां डिजिटल पहचान प्रणाली को शानदार सफलता मिली है। हमें भी उससे सीखने की जरूरत है।”
हालांकि, यूके सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल उनका सिस्टम बायोमेट्रिक डेटा शामिल नहीं करेगा। इसके बावजूद ब्रिटेन में इस योजना को लेकर विपक्षी दलों और नागरिक समूहों में विरोध तेज है। आलोचकों का कहना है कि यह नागरिक स्वतंत्रता में दखल देगा और निजी जानकारी को जोखिम में डालेगा।
गौरतलब है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन में कभी भी आम नागरिकों के लिए अनिवार्य पहचान पत्र नहीं रहे। पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर के समय भी ऐसा प्रयास हुआ था, लेकिन तीव्र विरोध के चलते योजना ठंडे बस्ते में चली गई थी। फिलहाल, स्टारमर का यह कदम ब्रिटेन की नौकरशाही और पहचान व्यवस्था में डिजिटल क्रांति ला सकता है — और भारत का आधार मॉडल इसके केंद्र में दिखाई दे रहा है।
