बिहार की राजनीति में सोमवार की रात किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रही। दिन में जब आरजेडी नेताओं के हाथ पीले लिफाफे पहुँचे, तो उन्हें लगा कि अब उनका टिकट पक्का हो गया। घर-घर मिठाई बँटी, बधाइयाँ मिलीं। लेकिन कुछ घंटों बाद सबकुछ बदल गया।
लालू प्रसाद यादव दिल्ली से लौटे थे, और उनके आवास के बाहर टिकट चाहने वालों की भीड़ लगी थी। शाम होते-होते कई नेताओं को बुलाया गया, और उन्हें पार्टी का चुनाव चिन्ह सौंपा गया। पर जैसे ही तेजस्वी यादव दिल्ली से लौटे, अचानक हालात पलट गए।
रात होते-होते फोन आने लगे — “आपको बुलाया गया है… चिन्ह वापस कीजिए।” नेता हैरान थे, मगर आदेश था, तो चले गए। कुछ घंटों पहले जिनके पास उम्मीद की चिट्ठी थी, वो अब उसे लौटाकर लौट रहे थे।
किसी को वजह नहीं बताई गई। कुछ नेताओं ने कहा कि “किसी को चिन्ह मिला ही नहीं था,” तो कुछ ने सोशल मीडिया पर आई तस्वीरों को “AI से बनी अफवाह” बताया। महागठबंधन में सीट बंटवारे की खींचतान जारी है, और इस घटना ने आरजेडी के अंदर की हलचलें उजागर कर दी हैं।
