गृह मंत्री अमित शाह ने आज कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला, और 2013 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा लाए गए अध्यादेश को फाड़ने की घटना को याद दिलाते हुए सवाल किया, “अगर तब नैतिकता थी, तो अब क्यों नहीं?”
अमित शाह ने राहुल गांधी के उस रुख पर सवाल उठाया जिसमें वे प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री को जेल में रहने पर पद से हटाने वाले संविधान संशोधन विधेयक (130वां संशोधन, 2025) का विरोध कर रहे हैं। शाह बोले, “नैतिकता चुनाव हारने-जीतने से नहीं चलती, वह स्थिर होती है—सूरज और चांद की तरह।”
उन्होंने याद दिलाया कि राहुल ने 2013 में उस अध्यादेश को फाड़ा था जो लालू प्रसाद यादव की सजा के बावजूद संसद सदस्य बने रहने की छूट देता था।
शाह ने कहा, “अगर कोई नेता 30 दिन तक जेल में है और ज़मानत नहीं मिल रही, तो क्या वह जेल से सरकार चलाएगा?” उन्होंने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के इस्तीफा न देने पर भी आपत्ति जताई और कहा कि इससे “राजनीतिक और सामाजिक नैतिकता का स्तर गिरा है।”
उन्होंने यह भी बताया कि जब उन्हें सोहराबुद्दीन केस में CBI ने बुलाया था, उन्होंने तत्काल इस्तीफा दे दिया और जब तक आरोप पूरी तरह खारिज नहीं हुए, तब तक कोई संवैधानिक पद नहीं संभाला।
शाह ने विश्वास जताया कि यह बिल संसद से पारित होकर रहेगा।
