राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि किसी व्यक्ति का नाम, क्षमता और सम्मान कुछ भी हो, हर कोई समान है और कोई मतभेद नहीं हैं।
वे संत शिरोमणि रोहिदास की 647वीं जयंती के अवसर पर रवींद्र नाट्य मंदिर के सभागार में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, श्री भागवत ने कहा, “सत्य ईश्वर है। नाम, क्षमता और सम्मान कुछ भी हो, सभी समान हैं और कोई मतभेद नहीं हैं।
कुछ पंडित शास्त्रों के आधार पर जो कहते हैं वह झूठ है”। उन्होंने कहा, “हम जाति श्रेष्ठता के भ्रम से भ्रमित हैं और इस भ्रम को दूर करना होगा।”
मोहन भागवत ने कहा कि देश में विवेक और चेतना सभी समान हैं, और केवल राय अलग हैं। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि संत रोहिदास का कद तुलसीदास, कबीर और सूरदास से भी बड़ा है, इसलिए उन्हें संत शिरोमणि माना जाता हैं।
“यद्यपि वह शास्त्रथ में ब्राह्मणों को नहीं जीत सका, लेकिन वह कई दिलों को छूने में सक्षम था और उन्हें भगवान में विश्वास दिलाता था,” उन्होंने कहा।
उन्होंने संत रोहिदास का आह्वान करते हुए कहा कि धर्म केवल अपना पेट भरना नहीं हैं। “अपना काम करो, और अपने धर्म के अनुसार करो।
समाज को एकजुट करो और उसकी प्रगति के लिए काम करो, क्योंकि धर्म यही हैं। ऐसे विचारों और उच्च आदर्शों के कारण ही कई बड़े नाम संत रोहिदास के शिष्य बने।”
श्री भागवत ने कहा कि संत रोहिदास ने समाज को चार मंत्र दिए- सत्य, करुणा, आंतरिक पवित्रता और निरंतर परिश्रम और प्रयास। “अपने आस-पास जो कुछ भी हो रहा है उस पर ध्यान दो लेकिन धर्म को किसी भी हाल में मत छोड़ो।
धार्मिक संदेश देने के तरीके भले ही अलग हों, लेकिन संदेश अपने आप में एक ही हैं। दूसरे धर्मों के लिए द्वेष के बिना अपने धर्म का पालन करना चाहिए,” उन्होंने कहा।
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