भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा है कि भारत की सुरक्षा रणनीति में ज़मीन पर पकड़ ही जीत का असली पैमाना है। मंगलवार को एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने साफ़ कहा, “भारत में जीत की करेंसी ज़मीन ही रहेगी।”
उन्होंने हाल ही में अमेरिका और रूस के बीच अलास्का में हुई बातचीत का उदाहरण दिया और कहा, “उस बैठक में भी दोनों देशों के नेता केवल इस पर चर्चा कर रहे थे कि कितनी ज़मीन किसके पास जाएगी। यही असलियत है—युद्धों का निष्कर्ष हमेशा ज़मीन से ही तय होता है।”
जनरल द्विवेदी ने यह भी दोहराया कि भारत को चीन और पाकिस्तान जैसे दो मोर्चों के साथ-साथ आंतरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में थलसेना की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
उन्होंने कहा कि भारतीय सेना युद्ध की बदलती तकनीकों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही है और आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन और नई हथियार प्रणालियों को तेज़ी से शामिल कर रही है।
संदेश साफ़ था—हवा और समंदर का महत्व अपनी जगह है, लेकिन भारत में जीत का फ़ैसला ज़मीन पर ही होगा।
