सुप्रीम कोर्ट ने आज 1000 रुपये और 500 रुपये के नोटों के विमुद्रीकरण को बरकरार रखा। एक अलग फैसले में, न्यायमूर्ति बीवी नागरथाना न्यायमूर्ति बीआर गवई के आदेश से अलग थे क्योंकि अदालत ने केंद्र की 2016 की कवायद का समर्थन किया था।
आरबीआई अधिनियम की धारा 26 में उल्लिखित शब्द ‘कोई’ को प्रतिबंधात्मक अर्थ नहीं दिया जा सकता है (यह याचिकाकर्ताओं के तर्क को संदर्भित करता है कि एक मूल्यवर्ग की सभी श्रृंखलाओं का विमुद्रीकरण नहीं किया जा सकता है क्योंकि आरबीआई अधिनियम की धारा 26 में “कोई भी” और “सभी” नहीं) का उल्लेख हैं।
निर्णय लेने की प्रक्रिया को केवल इसलिए दोष नहीं दिया जा सकता क्योंकि प्रस्ताव केंद्र से आया था। हमने माना है कि प्राप्त किए जाने वाले उद्देश्यों के साथ एक उचित संबंध था। आनुपातिकता के आधार पर विमुद्रीकरण की कवायद को रद्द नहीं किया जा सकता हैं।
